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Module 1
टेक्निकल एनालिसिस का फाउंडेशन (foundation of technical analysis)
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Chapter 7 | 6 min read

वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis)

अब, आप शहर से बाहर निकल रहे हैं और एक व्यस्त हाइवे पर गाड़ी चला रहे हैं। ये सिर्फ सड़क पर कारों की संख्या के बारे में नहीं है, बल्कि ये भी कि वे कितनी तेजी से चल रही हैं और लेन कितनी भरी हुई हैं। जितना भारी ट्रैफिक, उतना ही महत्वपूर्ण वाहनों का प्रवाह होता है। स्टॉक मार्केट (stock market) में, वॉल्यूम (volume) ट्रैफिक की तरह है—यह आपको बताता है कि कितने शेयर्स ट्रेड किए जा रहे हैं किसी दिए गए समय पर, जिससे प्राइस मूवमेंट की स्ट्रेंथ या वीकनेस का अंदाजा मिलता है। वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis) को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ट्रेंड्स को कंफर्म करने में मदद करता है और संकेत देता है कि कोई मार्केट मूव जारी रहेगा या रिवर्स होगा।

इस चैप्टर में, हम वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis) की अवधारणा को तोड़ेंगे, बताएंगे कि यह क्यों महत्वपूर्ण है, और दिखाएंगे कि आप इसका उपयोग बेहतर ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए कैसे कर सकते हैं।

साधारण शब्दों में, वॉल्यूम (volume) उस संख्या को संदर्भित करता है जितने शेयर्स या कॉन्ट्रैक्ट्स किसी विशेष अवधि के दौरान ट्रेड किए जाते हैं, आमतौर पर एक दिन में मापा जाता है। यह स्टॉक की गतिविधि के स्तर का प्रतिनिधित्व करता है, यह प्रकट करता है कि खरीदने या बेचने में कितनी रुचि है।

जैसे हाइवे पर, जहां अधिक कारें भारी ट्रैफिक का संकेत देती हैं, मार्केट में उच्च वॉल्यूम का मतलब है कि उस स्टॉक में अधिक रुचि है। ट्रेडर्स वॉल्यूम का उपयोग प्राइस मूवमेंट की स्ट्रेंथ को कंफर्म करने के लिए करते हैं—चाहे प्राइस बढ़ रही हो या गिर रही हो। वॉल्यूम एक सपोर्टिंग इंडिकेटर के रूप में कार्य करता है जो प्राइस मूवमेंट्स को गहराई देता है।

लेकिन वॉल्यूम इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए इसे आगे एक्सप्लोर करें।

Image Courtesy: Tradingview

वॉल्यूम एक ट्रेंड की मान्यता (validity of a trend) की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब स्टॉक प्राइस बढ़ता या घटता है, तो यह जानना जरूरी है कि क्या यह मूवमेंट मजबूत ट्रेडिंग एक्टिविटी द्वारा समर्थित है। उच्च वॉल्यूम यह सुझाव देता है कि कई ट्रेडर्स खरीद या बिक्री कर रहे हैं, जो प्राइस मूवमेंट को मजबूत बनाता है, जबकि कम वॉल्यूम यह संकेत दे सकता है कि मूवमेंट में दृढ़ता की कमी है और यह अस्थायी हो सकता है।

यहां बताया गया है कि वॉल्यूम क्यों मायने रखता है:

  • राइजिंग प्राइस + हाई वॉल्यूम: एक मजबूत अपट्रेंड को दर्शाता है। प्राइस में वृद्धि महत्वपूर्ण खरीदारी रुचि द्वारा समर्थित है।
  • राइजिंग प्राइस + लो वॉल्यूम: यह एक कमजोर या अस्थायी वृद्धि का संकेत हो सकता है। बिना मजबूत वॉल्यूम के, प्राइस जल्द ही रिवर्स हो सकता है।
  • फॉलिंग प्राइस + हाई वॉल्यूम: एक मजबूत डाउनट्रेंड का सुझाव देता है। सेलर्स हावी हैं, और प्राइस जारी रह सकता है।
  • फॉलिंग प्राइस + लो वॉल्यूम: एक कमजोर या अस्थायी गिरावट का संकेत देता है। यदि खरीदार मार्केट में फिर से प्रवेश करते हैं, तो प्राइस स्थिर हो सकता है या रिवर्स हो सकता है।

वॉल्यूम आपको मजबूत ट्रेंड्स (strong trends) और फॉल्स सिग्नल्स (false signals) के बीच अंतर करने में मदद करता है, जैसे भारी ट्रैफिक आपको यह समझने में मदद करता है कि हाईवे पर वाहनों का प्रवाह सामान्य है या आगे कोई अवरोध है।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis - TA) में, वॉल्यूम को अक्सर प्राइस ट्रेंड्स और पैटर्न्स की पुष्टि के लिए उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है। चलिए इसे हम पिछले चैप्टर में सीखे गए सपोर्ट और रेसिस्टेंस (support and resistance) से जोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई स्टॉक प्राइस एक रेसिस्टेंस लेवल (resistance level) के करीब पहुंचता है, तो ट्रेडर्स वॉल्यूम को देखते हैं ताकि यह समझ सकें कि प्राइस रेसिस्टेंस को तोड़ेगा या वापस लौटेगा।

  • अगर प्राइस उच्च वॉल्यूम के साथ रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ता है, तो यह पुष्टि करता है कि ब्रेकआउट असली है, और स्टॉक शायद बढ़ता रहेगा।
  • अगर प्राइस उच्च वॉल्यूम के साथ सपोर्ट लेवल के करीब आता है लेकिन इसे तोड़ने में विफल रहता है, तो यह सुझाव देता है कि सपोर्ट मजबूत है, और प्राइस वापस ऊपर जा सकता है।

दोनों ही मामलों में, वॉल्यूम यह पुष्टि करने में मदद करता है कि प्राइस उसी दिशा में आगे बढ़ेगा या रिवर्स होगा।

चलिए देखते हैं कुछ सामान्य तकनीकें जो ट्रेडर्स वॉल्यूम का विश्लेषण करने के लिए उपयोग करते हैं और इससे उन्हें मार्केट के बारे में क्या पता चलता है।

1. वॉल्यूम स्पाइक्स (Volume Spikes)

एक वॉल्यूम स्पाइक (volume spike) शेयरों के ट्रेड किए जाने की वॉल्यूम में अचानक तेज वृद्धि है। यह आमतौर पर तब होता है जब कोई महत्वपूर्ण समाचार या प्रमुख घटना होती है जो खरीद या बिक्री की भीड़ को ट्रिगर करती है। वॉल्यूम स्पाइक्स अक्सर एक नए ट्रेंड की शुरुआत या पुराने ट्रेंड के अंत का संकेत देते हैं।

Image Courtesy: Tradingview

उदाहरण के लिए, अगर Tata Motors एक बड़ा पार्टनरशिप अनाउंस करता है, तो वॉल्यूम (volume) स्पाइक कर सकता है क्योंकि ट्रेडर्स स्टॉक खरीदने के लिए दौड़ पड़ते हैं, जिससे प्राइस (price) ऊपर चला जाता है। इसके विपरीत, अगर कोई कंपनी खराब अर्निंग्स रिजल्ट्स (earnings results) जारी करती है, तो वॉल्यूम स्पाइक (volume spike) हो सकता है क्योंकि ट्रेडर्स अपने शेयर्स बेचते हैं।

2. वॉल्यूम और प्राइस डायवर्जेंस (Volume and Price Divergence)

कभी-कभी, प्राइस (price) और वॉल्यूम (volume) विपरीत दिशाओं में मूव करते हैं, जिसे डायवर्जेंस (divergence) कहा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी स्टॉक की प्राइस (price) बढ़ रही है लेकिन वॉल्यूम (volume) घट रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि प्राइस मूवमेंट (price movement) अपनी स्ट्रेंथ (strength) खो रहा है, और एक रिवर्सल (reversal) संभावित हो सकता है। यह डायवर्जेंस (divergence) एक सिग्नल (signal) है कि ट्रेडर्स को खरीदारी जारी रखने में सावधानी बरतनी चाहिए।

छवि सौजन्य: ट्रेडिंगव्यू

3. औसत वॉल्यूम (average volume)

कई ट्रेडर्स किसी स्टॉक के औसत वॉल्यूम (average volume) को देख कर उसकी सामान्य गतिविधि का अंदाज़ा लगाते हैं। अगर कोई स्टॉक अचानक अपने औसत से बहुत अधिक वॉल्यूम्स पर ट्रेड करता है, तो यह संकेत देता है कि कुछ महत्वपूर्ण हो रहा है, चाहे वह प्राइस ब्रेकआउट (price breakout) हो या रिवर्सल (reversal)

Image Courtesy: Tradingview

4. Volume Indicators (वॉल्यूम इंडिकेटर्स)

कुछ विशेष वॉल्यूम इंडिकेटर्स (volume indicators) होते हैं जो ट्रेडर्स को मार्केट वॉल्यूम (market volume) का विश्लेषण करने में मदद करते हैं:

  • On-Balance Volume (OBV): OBV क्यूम्युलेटिव (cumulative) खरीद और बिक्री के प्रेशर (pressure) को मापता है, अप डेज़ (up days) में वॉल्यूम (volume) जोड़कर और डाउन डेज़ (down days) में वॉल्यूम घटाकर। यह ट्रेडर्स को यह देखने में मदद करता है कि प्राइस मूवमेंट (price movements) के दौरान व्यापक बाजार खरीद रहा है या बेच रहा है।

  • Volume Weighted Average Price (VWAP): VWAP किसी विशेष अवधि में वॉल्यूम द्वारा वेटेड (weighted) स्टॉक की औसत कीमत की गणना करता है। ट्रेडर्स अक्सर VWAP का उपयोग एक बेंचमार्क (benchmark) के रूप में करते हैं यह देखने के लिए कि क्या वर्तमान मूल्य दिन की ट्रेडिंग गतिविधि (trading activity) की तुलना में उचित है।

Image Courtesy: Tradingview

Example: Volume Analysis with Tata Motors

चलो फिर से हमारे Tata Motors के उदाहरण पर लौटते हैं। मान लो Tata Motors का स्टॉक प्राइस कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आप देख रहे हैं कि वॉल्यूम (volume) घट रहा है। यह संकेत हो सकता है कि अपट्रेंड ताकत खो रहा है, और एक रिवर्सल (reversal) आने वाला है। आप शायद अधिक शेयर खरीदने से रुक सकते हैं या मौजूदा होल्डिंग्स बेचकर प्रॉफिट लॉक कर सकते हैं।

दूसरी ओर, अगर आप देखते हैं कि Tata Motors एक रेजिस्टेंस लेवल (resistance level) को तोड़ते समय एक वॉल्यूम स्पाइक (volume spike) होता है, तो यह कंफर्म करता है कि ब्रेकआउट (breakout) असली है, और आप अधिक शेयर खरीदने का निर्णय ले सकते हैं, यह उम्मीद करते हुए कि प्राइस बढ़ता रहेगा।

वॉल्यूम आपको मार्केट की स्ट्रेंथ (strength) की एक क्लियर पिक्चर देता है, जिससे आप अधिक सूचित निर्णय ले सकते हैं।

वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis) ट्रेडर्स को ट्रेंड रिवर्सल्स (trend reversals) पहचानने में भी मदद कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई स्टॉक एक स्ट्रॉन्ग अपट्रेंड (uptrend) में है, लेकिन अचानक एक वॉल्यूम स्पाइक के साथ प्राइस में तेज गिरावट आती है, तो यह संकेत हो सकता है कि अपट्रेंड खत्म हो गया है और एक डाउनट्रेंड (downtrend) शुरू हो रहा है। इसी तरह, अगर कोई स्टॉक डाउनट्रेंड में है और एक वॉल्यूम स्पाइक के साथ प्राइस में तेज उछाल आता है, तो यह अपट्रेंड की शुरुआत का संकेत हो सकता है।

वॉल्यूम ब्रेकआउट्स और ब्रेकडाउन (breakouts and breakdowns) को कंफर्म करने में विशेष रूप से उपयोगी है। एक ब्रेकआउट तब होता है जब स्टॉक प्राइस एक रेजिस्टेंस लेवल को पार करता है, और एक ब्रेकडाउन तब होता है जब प्राइस एक सपोर्ट लेवल (support level) से नीचे गिरता है। दोनों मामलों में, अगर मूवमेंट हाई वॉल्यूम (high volume) के साथ होता है, तो यह एक वैलिड ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन होने की अधिक संभावना है, जो एक नए ट्रेंड की शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल्यूम ट्रेडर्स को प्राइस मूवमेंट की स्ट्रेंथ समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जबकि प्राइस एक्शन (price action) अकेले यह बता सकता है कि स्टॉक किस दिशा में जा रहा है, वॉल्यूम एक अतिरिक्त लेयर ऑफ इनसाइट (layer of insight) जोड़ता है, यह कंफर्म करते हुए कि मूवमेंट सस्टेनेबल है या रिवर्स होने की संभावना है। जैसे ट्रैफिक फ्लो को समझना आपको शहर में नेविगेट करने में मदद करता है, वैसे ही वॉल्यूम एनालिसिस आपको स्टॉक मार्केट में आत्मविश्वास के साथ नेविगेट करने में मदद करता है।

Conclusion

वॉल्यूम एनालिसिस तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का एक मुख्य पहलू है, जो ट्रेडर्स को ट्रेंड्स कंफर्म करने, रिवर्सल्स को पहचानने और मार्केट की स्ट्रेंथ का आकलन करने में मदद करता है। वॉल्यूम स्पाइक्स, डाइवर्जेंस (divergence), और वॉल्यूम इंडिकेटर्स जैसे OBV और VWAP पर ध्यान देकर, ट्रेडर्स समझदारी और अधिक सूचित ट्रेडिंग निर्णय ले सकते हैं।

इस आर्टिकल तक, हमने TA के सभी बेसिक पहलुओं को सीखा है। अब, चार्ट पैटर्न्स को समझने का समय आ गया है।

This content has been translated using a translation tool. We strive for accuracy; however, the translation may not fully capture the nuances or context of the original text. If there are discrepancies or errors, they are unintended, and we recommend original language content for accuracy.

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