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Chapter 5 | 2 min read
असफलताओं और सफलताओं से सीखे गए सबक (Lessons Learned from Failures & Successes)
कोई भी स्क्रीनेर परफेक्ट नहीं होता। कुछ आपको ऐसे लिस्ट देंगे जो पेपर पर शानदार दिखती हैं लेकिन असली ट्रेड्स में फेल हो जाती हैं। कुछ आपको उम्मीद से बेहतर काम करके चौंका सकते हैं।
असली मूल्य फेलियर्स और सक्सेस दोनों से सीखने में है।
1. सामान्य फेलियर: ओवरफिटिंग (overfitting)
एक स्क्रीनेर जो बैकटेस्ट्स में फ्लॉलेस (flawless) दिखता था लेकिन असली मार्केट्स में फेल हो गया।
उदाहरण:
2020 के बुल रन (bull run) के दौरान एक एआई प्रॉम्प्ट — “मुझे मिड-कैप आईटी स्टॉक्स (mid-cap IT stocks) दिखाओ जिनका आरएसआई (RSI) 30 से कम है, वे हमेशा बाउंस बैक करते हैं।”
तब शानदार तरीके से काम किया। 2022 में बुरी तरह फेल हो गया जब मार्केट्स चॉपी (choppy) हो गए।
सीख: सिर्फ एक मार्केट फेज में नहीं बल्कि अलग-अलग मार्केट फेजेस में बैकटेस्ट करें।
2. सामान्य फेलियर: सेंटिमेंट पर आँख मूंद कर भरोसा
सेंटिमेंट-बेस्ड स्क्रीनेर्स (sentiment-based screeners) हाइप (hype) से गुमराह हो सकते हैं।
उदाहरण:
आईपीओ सीजन (IPO season) के दौरान, एआई ने “ओवरसब्सक्राइब्ड (oversubscribed)” और “हाई डिमांड (high demand)” जैसे स्ट्रॉन्ग “पॉजिटिव सेंटिमेंट (positive sentiment)” कीवर्ड्स वाले कंपनियों को फ्लैग किया।
लेकिन उनमे से कई स्टॉक्स लिस्टिंग के बाद गिरे क्योंकि फंडामेंटल्स (fundamentals) कमजोर थे।
सीख: सेंटिमेंट तभी काम करता है जब इसे फाइनेंशियल स्ट्रेंथ (financial strength) और प्राइस एक्शन (price action) के साथ मिलाकर देखा जाए।
3. सामान्य सफलता: फंडामेंटल्स + टेक्निकल्स का कॉम्बिनेशन
सबसे स्ट्रॉन्ग रिजल्ट्स अक्सर तब आते हैं जब दोनों पक्ष सहमत होते हैं।
उदाहरण:
एक स्क्रीनेर जो “निफ्टी 100 कंपनियां जिनका ROE 15% से ऊपर है, डेब्ट-टू-इक्विटी (debt-to-equity) 0.5 से कम है, और 200-DMA के ऊपर ट्रेड कर रही हैं।” पूछता है।
कंपनियों की स्थिर शॉर्टलिस्ट्स को लगातार प्रोड्यूस किया जैसे HDFC बैंक, इंफोसिस, टाटा
कंज्यूमर।
सीख: फंडामेंटल्स को टेक्निकल्स के साथ क्रॉस-चेक करने से फॉल्स पॉजिटिव्स (false positives) कम होते हैं।
4. सामान्य सफलता: इसे सिंपल रखना
सबसे अच्छे स्क्रीनेर्स सबसे जटिल नहीं होते।
उदाहरण:
एक बहुत बेसिक फिल्टर — “प्राइस 200-DMA के ऊपर और RSI 40–60 के बीच” — साप्ताहिक रूप से उपयोग किया गया। परफेक्ट होने की कोशिश नहीं की, लेकिन बिना ओवरफिटिंग के विश्वसनीय कैंडिडेट्स दिए।
सीख: सिंपल, रिपीटेबल रूल्स अक्सर कॉम्प्लेक्स (complex) वाले रूल्स को मात देते हैं।
इन सीखे गए पाठों को कैसे लागू करें
- एक मार्केट फेज के परिणामों पर भरोसा न करें — हमेशा बुल, बियर, और साइडवेज कंडीशन्स में टेस्ट करें।
- इंडिकेटर्स को मिलाएं: फंडामेंटल्स, टेक्निकल्स, और सेंटिमेंट को एक साथ।
- सिंपल प्रॉम्प्ट्स से शुरू करें; जरूरत पड़ने पर ही लेयर्स जोड़ें।
- परफॉर्मेंस को ट्रैक करें: एक शीट रखें जिसमें यह लॉग करें कि कौन से स्क्रीनेर्स काम किए और कौन से फेल हुए।
- फेलियर्स को फीडबैक के रूप में उपयोग करें — प्रॉम्प्ट्स को रिफाइन करें बजाय उन्हें छोड़ने के।
अंतिम निष्कर्ष
फेलियर्स आपको दिखाते हैं कि स्क्रीनेर्स कहाँ टूटते हैं। सक्सेस आपको दिखाते हैं कि क्या लगातार काम करता है। दोनों ही समान रूप से मूल्यवान हैं।
मुख्य बात है एआई को पार्टनर की तरह ट्रीट करें — टेस्ट, रिफाइन, और इसके साथ सीखें, हर बार परफेक्ट आंसर की उम्मीद करने की बजाय।
अंत में, अच्छे निवेशक गलतियों से नहीं बचते। वे अगले ट्रेड के लिए अपनी धार को तेज करने के लिए उनका उपयोग करते हैं।
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