
Chapter 3 | 3 min read
एग्जिट लोड्स (exit loads) और एंट्री लोड्स (entry loads)
प्रिय और रवि म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) में इन्वेस्टिंग (investing) की विशेषताओं को और गहराई से समझने में लगे हुए हैं। अपनी हालिया बातचीत में, उन्होंने "एंट्री लोड (entry load)" और "एग्जिट लोड (exit load)" जैसे शब्दों का सामना किया। रवि ने पूछा कि क्या उन्हें इन फीस को निर्णय लेने में ध्यान में रखना चाहिए, और प्रिय जानना चाहती हैं कि ये फीस उनके इन्वेस्टमेंट्स (investments) को कैसे प्रभावित करती हैं।
उन्होंने एंट्री और एग्जिट लोड्स (entry and exit loads) को समझने का निर्णय लिया ताकि वे इन खर्चों को पूरी तरह से समझ सकें और यह जान सकें कि ये उनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी (investment strategy) को कैसे प्रभावित करते हैं।
म्यूचुअल फंड यूनिट्स (mutual fund units) खरीदने के लिए आप जो कीमत देते हैं, उसे एंट्री लोड (entry load) कहा जाता है। सभी फंड्स (funds) में यह सुविधा नहीं होती, और सिर्फ कुछ ही फंड्स में यह होती है। अगर किसी फंड में एंट्री लोड है, तो आपके इन्वेस्टमेंट (investment) का एक छोटा हिस्सा इस लागत को कवर करने के लिए उपयोग किया जाता है, जो आपके द्वारा इन्वेस्ट की गई कुल राशि से काट लिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10,000 इन्वेस्ट करते हैं और एंट्री लोड 2% है, तो आप सिर्फ ₹9,800 इन्वेस्ट करेंगे। एंट्री लोड आमतौर पर एक बार की फीस होती है जो खरीद के समय चार्ज की जाती है।
एंट्री लोड्स (entry loads) कम आम होते जा रहे हैं। 2009 में, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) के लिए एंट्री लोड्स पर बैन लगा दिया। हालांकि, कुछ फंड्स अभी भी यह फीस चार्ज करते हैं, खासकर कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स के माध्यम से किए गए इन्वेस्टमेंट्स में। इन्वेस्टिंग से पहले यह चेक करना जरूरी है कि कोई एंट्री लोड लागू होता है या नहीं, ताकि आपको पता चल सके कि आपकी कितनी राशि फंड में जा रही है।
दूसरी ओर, एग्जिट लोड (exit load) वह राशि है जो आप म्यूचुअल फंड यूनिट्स (mutual fund units) को रिडीम या बेचने पर चुकाते हैं। यह फीस आपके रिडेम्प्शन अमाउंट (redemption amount) के प्रतिशत के रूप में चार्ज की जाती है और आमतौर पर अगर आप अपने यूनिट्स को इन्वेस्टमेंट की तारीख से एक या दो साल के भीतर बेचते हैं तो यह लगाई जाती है। यह शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स (short-term traders) को सिस्टम में जल्दी से अंदर-बाहर होने से हतोत्साहित करती है और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग (long-term investing) को प्रोत्साहित करती है।
मान लीजिए कि आपने किसी फंड में ₹10,000 इन्वेस्ट किया है। एक साल बाद, आपके इन्वेस्टमेंट का मूल्य ₹12,000 हो गया है। अगर फंड में 1% का एग्जिट लोड है, तो आपको अपने इन्वेस्टमेंट को रिडीम करने पर ₹120 चार्ज किए जाएंगे।
एग्जिट लोड (exit load) आपके इन्वेस्टमेंट की अवधि के आधार पर गणना की जाती है। जितनी देर आप इन्वेस्टेड (invested) रहते हैं, सामान्यतः एग्जिट लोड उतना ही कम होता है। कुछ फंड्स में कोई "एग्जिट लोड (exit load)" नहीं होता, और अगर आप उन्हें बेचते हैं या यूनिट्स को रिडीम करते हैं तो आपको कुछ भी नहीं चुकाना पड़ता।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अलग-अलग फंड्स के अलग-अलग रेट्स होते हैं और सभी फंड्स में एग्जिट लोड्स (exit loads) नहीं होते। विशेष म्यूचुअल फंड प्लान (mutual fund plan) सटीक प्रतिशत और होल्डिंग अवधि को निर्धारित करता है। इन्वेस्टिंग से पहले, हमेशा स्कीम डाक्यूमेंट्स (scheme documents) की समीक्षा करें या अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें ताकि इन फीस को पूरी तरह समझ सकें।
एंट्री और एग्जिट लोड्स (entry and exit loads) दोनों ही आपके रिटर्न्स (returns) को प्रभावित करने वाले खर्चे हैं। भले ही ये पहली नजर में छोटे लग सकते हैं, ये समय के साथ बढ़ सकते हैं। इसलिए म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) की तुलना करते समय इन फीस को ध्यान में रखना आवश्यक है। लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स (long-term investors) के लिए, अगर वे अपने इन्वेस्टमेंट्स (investments) को लंबे समय तक होल्ड करने की योजना बनाते हैं, तो एग्जिट लोड्स (exit loads) उतना मायने नहीं रख सकते। लेकिन अगर आप शॉर्ट-टर्म गेंस (short-term gains) चाहते हैं, तो ये फीस महत्वपूर्ण अंतर ला सकती हैं।
हालांकि एग्जिट और एंट्री लोड्स (exit and entry loads) छुपे हुए खर्चों की तरह लगते हैं, उनका एक उद्देश्य होता है। वे फंड के ऑपरेशनल एक्सपेंसेस (operational expenses) को कवर करने और बार-बार ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने में मदद करते हैं, जो फंड और इन्वेस्टर (investor) दोनों के लिए महंगा हो सकता है। अगर आप इन फीस के बारे में जानते हैं, तो आप बेहतर इन्वेस्टमेंट निर्णय ले सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion):
एंट्री और एग्जिट लोड्स (entry and exit loads) के बारे में जानने के बाद, रवि और प्रिय को यह अहसास होता है कि इन्वेस्टिंग से पहले म्यूचुअल फंड के फीस स्ट्रक्चर (fee structure) की जांच करना कितना महत्वपूर्ण है। वे समझते हैं कि भले ही ये चार्जेज (charges) मामूली लग सकते हैं, ये समय के साथ उनके रिटर्न्स (returns) पर काफी प्रभाव डाल सकते हैं। अधिक ज्ञान से लैस होकर, वे सावधानी से आगे बढ़ने और फंड्स का चयन करते समय इन खर्चों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। अगले चरण में, हम म्यूचुअल फंड ट्रांजेक्शन प्रोसेस (mutual fund transaction process) और वित्तीय सलाहकारों की भूमिका की समीक्षा करेंगे ताकि आप इन प्रक्रियाओं को समझ सकें और कैसे एक सलाहकार सही इन्वेस्टमेंट निर्णय लेने में आपकी मदद कर सकता है।
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