
Chapter 1 | 3 min read
फिक्स्ड इनकम मार्केट पार्टिसिपेंट्स (fixed income market participants)
फिक्स्ड इनकम मार्केट (fixed income market) एक हाइपरएक्टिव इकोसिस्टम (bustling ecosystem) है जहां विभिन्न प्रतिभागी इशू (issue), खरीदने (buy), बेचने (sell), और डेब्ट सिक्योरिटीज (debt securities) को मैनेज (manage) करने के लिए इंटरैक्ट (interact) करते हैं। यह समझना कि ये खिलाड़ी कौन हैं और वे क्या भूमिकाएँ निभाते हैं, फिक्स्ड इनकम मार्केट (fixed income market) के फंक्शनिंग (functioning) को समझने के लिए आवश्यक है।
फिक्स्ड इनकम मार्केट (fixed income market) में प्रमुख प्रतिभागी:
1. इश्यूअर्स (Issuers):
ये वे एंटिटीज़ (entities) हैं जो बॉन्ड्स (bonds) या अन्य फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज़ (fixed income securities) जारी करके कैपिटल (capital) जुटाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- गवर्नमेंट्स (Governments): नेशनल, स्टेट, और म्यूनिसिपल गवर्नमेंट्स (national, state, and municipal governments) ऑपरेशंस और प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग (funding) हेतु बॉन्ड्स जारी करते हैं।
- कॉरपोरेशंस (Corporations): कंपनियाँ बिज़नेस एक्सपैंशंस (business expansions), एक्विज़िशन्स (acquisitions), या वर्किंग कैपिटल (working capital) के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड्स (corporate bonds) जारी करती हैं।
2. इन्वेस्टर्स (Investors):
ये प्रतिभागी अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (investment strategy) के तहत फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज़ (fixed income securities) खरीदते हैं। इनमें शामिल हैं:
- रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors): व्यक्तिगत निवेशक जो सीधे या म्यूचुअल फंड्स (mutual funds) के माध्यम से निवेश करते हैं।
- इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors): पेंशन फंड्स (pension funds), इंश्योरेंस कंपनियाँ (insurance companies), म्यूचुअल फंड्स और बैंक जो बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं।
- फॉरेन इन्वेस्टर्स (Foreign Investors): विदेशी एंटिटीज़ (entities) जो भारतीय फिक्स्ड इनकम मार्केट्स (Indian fixed income markets) में निवेश करते हैं, जिनपर करेंसी (currency) और रेगुलेटरी फैक्टर्स (regulatory factors) का प्रभाव होता है।
3. इंटरमीडियरीज़ (Intermediaries):
ये एंटिटीज़ (entities) इश्यूअर्स (issuers) और इन्वेस्टर्स (investors) के बीच ट्रांज़ैक्शन्स (transactions) की सुविधा प्रदान करती हैं, जिससे लिक्विडिटी (liquidity) और मार्केट एफिशिएंसी (market efficiency) सुनिश्चित होती है।
- इन्वेस्टमेंट बैंक्स और अंडरराइटर्स (Investment Banks and Underwriters): बॉन्ड्स के इश्यूअन्स (issuance) और डिस्ट्रीब्यूशन (distribution) का प्रबंधन करते हैं।
- ब्रोकर्स और डीलर्स (Brokers and Dealers): प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट्स (primary and secondary markets) में ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करते हैं।
- क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज़ (Credit Rating Agencies): क्रेडिट रिस्क (credit risk) का मूल्यांकन करती हैं और रेटिंग्स असाइन करती हैं जो इन्वेस्टर डिसीज़न्स (investor decisions) को प्रभावित करती हैं।
4. रेगुलेटर्स (Regulators):
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India - RBI) और सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Securities and Exchange Board of India - SEBI) जैसी संस्थाएं मार्केट ऑपरेशन्स (market operations) की निगरानी करती हैं, ट्रांसपेरेंसी (transparency) सुनिश्चित करती हैं, और निवेशकों की सुरक्षा करती हैं।
उदाहरण: जब भारत सरकार (Government of India) बॉन्ड्स जारी करती है, तो आरबीआई (RBI) इश्यूअर के एजेंट (agent) के रूप में कार्य करता है, नीलामियों और सेकेंडरी मार्केट ऑपरेशन्स (secondary market operations) का प्रबंधन करता है। म्यूचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स (institutional investors) अपने पोर्टफोलियो (portfolios) में इन बॉन्ड्स को खरीदते हैं।

क्यों मार्केट पार्टिसिपेंट्स (market participants) को समझना महत्वपूर्ण है:
- यह निवेशकों को यह जानने में मदद करता है कि बांड प्राइस (bond prices) और लिक्विडिटी (liquidity) को कौन प्रभावित करता है।
- इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बांड्स (bonds) कैसे इशू (issued), ट्रेड (traded), और रेगुलेट (regulated) होते हैं।
- विभिन्न प्लेयर्स (players) की भूमिकाओं और प्रेरणाओं को समझने में सहायता करता है।
भारत का फिक्स्ड इनकम मार्केट (fixed income market) विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी देख रहा है, खासकर सरकारी सिक्योरिटीज (government securities) में, साथ ही एलआईसी (LIC) और ईपीएफओ (EPFO) जैसे बड़े घरेलू संस्थानों के साथ। आरबीआई (RBI) की नीतियाँ और सेबी (SEBI) के नियम मार्केट स्थिरता और निवेशक विश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिक्स्ड इनकम मार्केट (fixed income market) एक डायनामिक सिस्टम (dynamic system) है जिसमें विभिन्न प्लेयर्स (players) मिलकर पूंजी प्रवाह को सुगम बनाते हैं। इन पार्टिसिपेंट्स (participants) को समझना बांड मार्केट (bond market) में समझदारी से नेविगेट और निवेश करने की कुंजी है। अगले चैप्टर (chapter) में, हम प्राइमरी और सेकेंडरी बांड मार्केट्स (primary and secondary bond markets) का अन्वेषण करेंगे, यह बताते हुए कि बांड्स (bonds) कहाँ और कैसे इशू (issued) और ट्रेड (traded) होते हैं।
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