
Chapter 3 | 2 min read
महंगाई से जुड़ी बॉन्ड्स (inflation-linked bonds)
कल्पना करो कि तुमने एक किसान को पैसा उधार दिया है, और एग्रीमेंट में कहा गया है कि अगर गेहूं की कीमत बढ़ती है तो तुम्हारे इंटरेस्ट पेमेंट्स (interest payments) भी बढ़ जाएंगे। इस तरह, तुम्हारी रिटर्न इन्फ्लेशन (inflation) के साथ तालमेल बनाए रखती है, जिससे तुम्हारी पर्चेज़िंग पावर (purchasing power) कम नहीं होती। यही कॉन्सेप्ट इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) के केंद्र में है — ये फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज (fixed income securities) इन्वेस्टर्स (investors) को इन्फ्लेशन रिस्क (inflation risk) से बचाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (Inflation-Linked Bonds) क्या हैं?
इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) वे गवर्नमेंट या कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (government or corporate bonds) होते हैं जिनके प्रिंसिपल और/या इंटरेस्ट पेमेंट्स (principal and/or interest payments) को किसी इन्फ्लेशन इंडेक्स (inflation index), जैसे कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (consumer price index - CPI) के आधार पर एडजस्ट किया जाता है। इस एडजस्टमेंट से ये सुनिश्चित होता है कि बॉन्ड का रियल वैल्यू (real value) — इसकी पर्चेज़िंग पावर (purchasing power) — समय के साथ सुरक्षित रहे।
मुख्य विशेषताएं:
- इन्फ्लेशन एडजस्टमेंट (Inflation Adjustment): प्रिंसिपल अमाउंट को इन्फ्लेशन के आधार पर समय-समय पर एडजस्ट किया जाता है, जिससे कूपन पेमेंट्स (coupon payments) (जो प्रिंसिपल का एक प्रतिशत होते हैं) इन्फ्लेशन के साथ बढ़ते हैं।
- इन्फ्लेशन के खिलाफ सुरक्षा (Protection Against Inflation): इन्वेस्टर्स (investors) को वह रिटर्न मिलता है जो उनके इन्वेस्टमेंट की वास्तविक पर्चेज़िंग पावर (real purchasing power) को दर्शाता है, जिससे ये बॉन्ड्स (bonds) इन्फ्लेशन बढ़ने के समय आकर्षक बन जाते हैं।
- गवर्नमेंट बैकिंग (Government Backing): कई इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) गवर्नमेंट द्वारा इश्यू किए जाते हैं, जिससे उच्च स्तर की क्रेडिट सेफ्टी (credit safety) सुनिश्चित होती है।
उदाहरण:
भारत सरकार के इन्फ्लेशन-इंडेक्स्ड बॉन्ड्स (Inflation-Indexed Bonds) प्रिंसिपल अमाउंट को CPI के आधार पर हर छह महीने में एडजस्ट करते हैं। अगर इन्फ्लेशन 6% बढ़ता है, तो प्रिंसिपल उसी के अनुसार बढ़ता है, और कूपन पेमेंट्स (coupon payments) इस उच्चतर अमाउंट पर कैलकुलेट होते हैं।
इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (Inflation-Linked Bonds) महत्वपूर्ण क्यों हैं?
- रियल रिटर्न्स (Real Returns): ये बॉन्ड्स इन्वेस्टर्स (investors) को रियल रिटर्न्स (real returns) प्रदान करते हैं जो इन्फ्लेशन के साथ तालमेल बनाए रखते हैं।
- पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (Portfolio Diversification): इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) को शामिल करके पोर्टफोलियो (portfolio) को इन्फ्लेशन शॉक्स (inflation shocks) से बचाया जा सकता है।
- लंबे समय के इन्वेस्टर्स के लिए उपयुक्त (Suitability for Long-Term Investors): पेंशन फंड्स और रिटायरिज़ जैसे लंबे समय की दृष्टि वाले इन्वेस्टर्स (investors) के लिए आदर्श होते हैं।
भारत में इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) ने लोकप्रियता हासिल की है, खासकर इन्फ्लेशन की बढ़ती चिंताओं के साथ। आरबीआई (RBI) नियमित रूप से ऐसे बॉन्ड्स (bonds) इश्यू करता है, जिससे इन्वेस्टर्स (investors) को इन्फ्लेशन रिस्क (inflation risk) से बचने के विकल्प मिलते हैं।
इन्फ्लेशन-लिंक्ड बॉन्ड्स (inflation-linked bonds) इन्वेस्टमेंट्स (investments) को इन्फ्लेशन इरोजन (inflation erosion) से बचाने का एक मूल्यवान साधन प्रदान करते हैं, जिससे रिटर्न्स समय के साथ पर्चेज़िंग पावर (purchasing power) बनाए रखते हैं। आगे हम कॉलएबल और पुटएबल बॉन्ड्स (callable and putable bonds) का अन्वेषण करेंगे, जो इश्यूअर्स (issuers) और इन्वेस्टर्स (investors) को अतिरिक्त फ्लेक्सिबिलिटी (flexibility) प्रदान करते हैं।
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