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Module 3
यील्ड और रिस्क एनालिसिस (Yield and Risk Analysis)
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Chapter 3 | 2 min read

फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट्स (fixed income investments) में क्रेडिट रिस्क (credit risk)

अपने दोस्त को पैसे उधार देने की कल्पना करो, जो वादा करता है कि वह आपको ब्याज के साथ वापस देगा। आप अपने दोस्त पर भरोसा करते हैं, लेकिन हमेशा यह संभावना रहती है कि वह वित्तीय परेशानी का सामना कर सकता है और आपको चुकाने में असमर्थ हो सकता है। इस डिफॉल्ट के जोखिम को क्रेडिट रिस्क (credit risk) कहा जाता है, और यह फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज (fixed income securities) में निवेश करते समय एक महत्वपूर्ण विचार होता है।

क्रेडिट रिस्क (credit risk) उस संभावना को संदर्भित करता है कि बॉन्ड जारीकर्ता — चाहे वह कॉर्पोरेशन हो, म्युनिसिपैलिटी हो, या सरकार — ब्याज भुगतान करने या परिपक्वता पर मूल राशि चुकाने में विफल रहेगा। फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टर्स (fixed income investors) के लिए, क्रेडिट रिस्क (credit risk) को समझना और प्रबंधित करना उनके निवेश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

  • जारीकर्ता की वित्तीय स्थिति: मजबूत बैलेंस शीट्स, स्थिर कैश फ्लो और अच्छी कमाई वाली कंपनियाँ या सरकारें अपने ऋण दायित्वों पर डिफॉल्ट करने की संभावना कम होती हैं।

  • क्रेडिट रेटिंग्स (Credit Ratings): भारत में CRISIL, ICRA, और CARE Ratings जैसी एजेंसियाँ जारीकर्ताओं की क्रेडिटवर्थिनेस (creditworthiness) का आकलन करती हैं। AAA रेटेड बॉन्ड्स को सबसे सुरक्षित माना जाता है, जबकि निचली रेटिंग्स उच्च जोखिम का संकेत देती हैं।

  • आर्थिक माहौल: आर्थिक मंदी के दौरान डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ सकता है क्योंकि जारीकर्ताओं को कम राजस्व और उच्च लागतों का सामना करना पड़ सकता है।

उच्च क्रेडिट रिस्क (credit risk) वाले बॉन्ड्स आमतौर पर निवेशकों को डिफॉल्ट के बढ़े हुए जोखिम के लिए मुआवजा देने के लिए उच्च यील्ड्स (yields) प्रदान करते हैं। यह रिस्क प्रीमियम (risk premium) बॉन्ड की कीमत में परिलक्षित होता है — जोखिम वाले बॉन्ड्स कम कीमतों पर व्यापार करते हैं।

उदाहरण:

एक सरकारी बॉन्ड (government bond) जो AAA रेटिंग का है, वह 6% यील्ड (yield) प्रदान कर सकता है, जबकि एक निम्न-रेटेड कंपनी का कॉर्पोरेट बॉन्ड (corporate bond) निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 9% की पेशकश कर सकता है, भले ही जोखिम अधिक हो।

  1. डाइवर्सिफिकेशन (Diversification): जारीकर्ताओं और सेक्टर्स में निवेशों को फैलाना किसी एकल डिफॉल्ट के जोखिम को कम कर सकता है।

  2. क्रेडिट रिसर्च (Credit Research): निवेशकों को जारीकर्ता की वित्तीय स्थिति, उद्योग की स्थितियों, और क्रेडिट रेटिंग ट्रेंड्स का विश्लेषण करना चाहिए।

  3. मॉनिटरिंग (Monitoring): बॉन्ड होल्डिंग्स की क्रेडिट क्वालिटी (credit quality) की लगातार निगरानी करना शुरुआती चेतावनी संकेतों का पता लगाने में मदद करता है।

भारत में, क्रेडिट रिस्क (credit risk) कॉर्पोरेट बॉन्ड निवेशकों के लिए एक प्रमुख कारक है। यस बैंक (Yes Bank) जैसी कंपनियों ने क्रेडिट डाउनग्रेड्स (credit downgrades) का सामना किया है, जिससे बॉन्ड की कीमतों और निवेशकों की रिटर्न्स पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्रेडिट रिस्क (credit risk) के माहौल की बारीकी से निगरानी करता है।

क्रेडिट रिस्क (credit risk) फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टिंग (fixed income investing) का एक अंतर्निहित हिस्सा है, लेकिन सावधानीपूर्वक विश्लेषण और रिस्क मैनेजमेंट (risk management) के साथ, निवेशक इस जोखिम को प्रभावी ढंग से नेविगेट कर सकते हैं। अगले अध्याय में, हम इंटरेस्ट रेट रिस्क (interest rate risk) और इसका प्रबंधन, फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियोस (fixed income portfolios) का एक और महत्वपूर्ण पहलू, का अन्वेषण करेंगे।

This content has been translated using a translation tool. We strive for accuracy; however, the translation may not fully capture the nuances or context of the original text. If there are discrepancies or errors, they are unintended, and we recommend original language content for accuracy.

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