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Module 7
एडवांस्ड फाइनेंशियल मॉडलिंग टेकनीक्स (advanced financial modeling techniques)
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Chapter 1 | 3 min read

तीन-स्टेटमेंट फाइनेंशियल मॉडल (3-Statement Financial Model) बनाना

एक 3-स्टेटमेंट फाइनेंशियल मॉडल (3-statement financial model) एक व्यापक फ्रेमवर्क है जो इनकम स्टेटमेंट (income statement), बैलेंस शीट (balance sheet), और कैश फ्लो स्टेटमेंट (cash flow statement) को लिंक करता है ताकि कंपनी की वित्तीय स्थिति का समग्र दृश्य प्रदान किया जा सके। इस मॉडल का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिनमें पूर्वानुमान, वित्तीय विश्लेषण, और निवेश निर्णय लेना शामिल है। इन स्टेटमेंट्स के बीच की आपसी कनेक्टिविटी यह सुनिश्चित करती है कि किसी एक स्टेटमेंट में किए गए बदलाव अन्य स्टेटमेंट्स में भी सही ढंग से परिलक्षित हों, जिससे एक डायनेमिक मॉडल बनता है।

इस अध्याय में, हम एक्सेल (Excel) में 3-स्टेटमेंट फाइनेंशियल मॉडल बनाना सीखेंगे, जिसमें स्टेटमेंट्स को प्रभावी ढंग से लिंक करने और तीनों घटकों में संगति सुनिश्चित करने पर ध्यान देंगे।

एक 3-स्टेटमेंट फाइनेंशियल मॉडल (3-statement financial model) तीन मुख्य वित्तीय स्टेटमेंट्स को इंटीग्रेट करता है:

  1. इनकम स्टेटमेंट (Income Statement): राजस्व, खर्चे, और मुनाफे का अवलोकन प्रदान करता है।

  2. बैलेंस शीट (Balance Sheet): कंपनी की संपत्तियों, देनदारियों, और इक्विटी को दिखाता है।

  3. कैश फ्लो स्टेटमेंट (Cash Flow Statement): ऑपरेटिंग, इन्वेस्टिंग, और फाइनेंसिंग एक्टिविटीज से कैश इन्फ्लोज़ और आउटफ्लोज़ का विवरण देता है।

इन स्टेटमेंट्स को लिंक करके, आप वित्तीय प्रदर्शन का पूर्वानुमान, तरलता का आकलन, और लाभप्रदता का विश्लेषण कर सकते हैं।

स्टेप 1: इनकम स्टेटमेंट बनाएं (Step 1: Build the Income Statement)

इनकम स्टेटमेंट (income statement) एक विशेष अवधि में कंपनी की लाभप्रदता को दर्शाता है। मुख्य घटकों में राजस्व, वस्तुओं की लागत (COGS), सकल लाभ, ऑपरेटिंग खर्चे, ब्याज, कर, और शुद्ध आय शामिल हैं।

  1. राजस्व (Revenue): ऐतिहासिक डेटा या धारणाओं के आधार पर राजस्व का पूर्वानुमान लगाएं।

  2. COGS: वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन की लागत का अनुमान लगाएं।

  3. सकल लाभ (Gross Profit): सकल लाभ की गणना राजस्व - COGS के रूप में करें।

  4. ऑपरेटिंग खर्चे (Operating Expenses): बिक्री, सामान्य, और प्रशासनिक (SG&A) खर्चे शामिल करें।

  5. ऑपरेटिंग आय (Operating Income): सकल लाभ - ऑपरेटिंग खर्चे के रूप में गणना करें।

  6. शुद्ध आय (Net Income): ब्याज, कर, और अन्य गैर-ऑपरेटिंग आइटम्स को शामिल करके शुद्ध आय प्राप्त करें।

स्टेप 2: बैलेंस शीट बनाएं (Step 2: Build the Balance Sheet)

बैलेंस शीट (balance sheet) कंपनी की वित्तीय स्थिति का स्नैपशॉट प्रदान करती है, यह दर्शाती है कि यह क्या मालिक है (संपत्तियां), क्या बकाया है (देनदारियां), और एक निश्चित समय पर इसकी इक्विटी।

  1. संपत्तियां (Assets): वर्तमान संपत्तियां (कैश, रिसीवेबल्स, इन्वेंटरी) और दीर्घकालिक संपत्तियां (प्रॉपर्टी, उपकरण) शामिल करें।

  2. देनदारियां (Liabilities): वर्तमान देनदारियां (अकाउंट्स पेएबल, शॉर्ट-टर्म डेट) और दीर्घकालिक देनदारियां (लॉन्ग-टर्म डेट) शामिल करें।

  3. इक्विटी (Equity): कुल संपत्तियां - कुल देनदारियां के रूप में गणना करें। इक्विटी में सामान्य स्टॉक, रिटेन्ड अर्निंग्स, और अतिरिक्त पेड-इन कैपिटल जैसे आइटम्स शामिल होते हैं।

स्टेप 3: कैश फ्लो स्टेटमेंट बनाएं (Step 3: Build the Cash Flow Statement)

कैश फ्लो स्टेटमेंट उस अवधि के दौरान कैश इन्फ्लोज़ और आउटफ्लोज़ को ट्रैक करता है। इसे तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:

  1. ऑपरेटिंग एक्टिविटीज (Operating Activities): कोर ऑपरेशंस से पैदा हुआ कैश (गैर-नकद आइटम्स जैसे अमोर्टाइजेशन और वर्किंग कैपिटल में बदलाव के लिए समायोजित शुद्ध आय)।

  2. इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज (Investing Activities): निवेशों में उपयोगी या उत्पन्न हुआ कैश, जैसे पूंजीगत व्यय या संपत्ति की बिक्री।

  3. फाइनेंसिंग एक्टिविटीज (Financing Activities): पूंजी जुटाने (ऋण या इक्विटी) से कैश और किए गए भुगतान, जैसे डिविडेंड्स या ऋण अदायगी।

स्टेप 4: स्टेटमेंट्स को लिंक करें (Step 4: Link the Statements)

एक प्रभावी 3-स्टेटमेंट मॉडल की कुंजी वित्तीयों को लिंक करना है:

  1. शुद्ध आय लिंक (Net Income Links): इनकम स्टेटमेंट की शुद्ध आय को कैश फ्लो स्टेटमेंट की ऑपरेटिंग एक्टिविटीज और बैलेंस शीट में रिटेन्ड अर्निंग्स से लिंक करें।

  2. अमोर्टाइजेशन और डेप्रिशिएशन (Depreciation and Amortisation): ये इनकम स्टेटमेंट पर गैर-नकद खर्चे हैं लेकिन इन्हें कैश फ्लो स्टेटमेंट पर वापस जोड़ा जाना चाहिए।

  3. कैपिटल एक्सपेंडिचर्स (Capital Expenditures): कैश फ्लो स्टेटमेंट में इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज के तहत दिखाई देते हैं और बैलेंस शीट पर दीर्घकालिक संपत्तियों को प्रभावित करते हैं।

  4. वर्किंग कैपिटल (Working Capital): वर्किंग कैपिटल आइटम्स में बदलाव (जैसे रिसीवेबल्स और पेएबल्स) बैलेंस शीट और कैश फ्लो स्टेटमेंट दोनों को प्रभावित करते हैं।

  1. संगति सुनिश्चित करें (Ensure Consistency): बैलेंस शीट को हमेशा संतुलित रहना चाहिए (संपत्तियां = देनदारियां + इक्विटी)।

  2. फॉर्मूलाज का उपयोग करें (Use Formulas): फॉर्मूलाज का उपयोग करके स्टेटमेंट्स को डायनेमिक रूप से लिंक करें, ताकि किसी एक स्टेटमेंट में बदलाव अन्य में परिलक्षित हो सके।

  3. सर्कुलर रेफरेंसेस की जांच करें (Check for Circular References): सर्कुलर रेफरेंसेस से बचें, जहां एक फॉर्मूला का परिणाम दूसरे पर अनंत लूप में निर्भर करता है। एक्सेल की इटरेटिव कैलकुलेशन फीचर इसको मैनेज करने में मदद कर सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion):

3-स्टेटमेंट फाइनेंशियल मॉडल बनाना पूर्वानुमान और वित्तीय विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है। इनकम स्टेटमेंट, बैलेंस शीट, और कैश फ्लो स्टेटमेंट को लिंक करके, आप एक डायनेमिक मॉडल बनाते हैं जो धारणाओं के बदलते ही स्वतः समायोजित हो जाता है।

अगले अध्याय की झलक (Next Chapter Preview): अगले अध्याय में, हम डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) मॉडलिंग फॉर वैल्यूइंग कंपनीज (Discounted Cash Flow (DCF) Modeling for Valuing Companies) की खोज करेंगे, जिसमें प्रोजेक्टेड कैश फ्लोज़ का उपयोग करके एक कंपनी की इन्ट्रिंसिक वैल्यू की गणना करना शामिल है। डीसीएफ विश्लेषण और मूल्यांकन तकनीकों को करने के विस्तृत चरणों के लिए बने रहें!

This content has been translated using a translation tool. We strive for accuracy; however, the translation may not fully capture the nuances or context of the original text. If there are discrepancies or errors, they are unintended, and we recommend original language content for accuracy.

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