
Chapter 3 | 2 min read
डिविडेंड डिस्काउंट मॉडल (Dividend Discount Model - DDM)
मान लो कि आप एक आम के बाग का मूल्यांकन कर रहे हैं, ना कि इस बात के लिए कि वो बाजार में बेचने के लिए कितने आम पैदा करेगा, बल्कि इसलिए क्योंकि वो हर साल आपको आम का एक निश्चित हिस्सा देता है — जैसे कि एक डिविडेंड (dividend)। अब, आप उस बाग का मूल्यांकन कैसे करेंगे? आप देखेंगे कि हर साल वो आपको कितना फल देता है, और कितनी विश्वसनीयता से देता है। यही डिविडेंड डिस्काउंट मॉडल (Dividend Discount Model - DDM) का मूल है — एक वैल्यूएशन मेथड (valuation method) जो कंपनी द्वारा अपने शेयरहोल्डर्स (shareholders) को दिए गए डिविडेंड्स (dividends) पर केंद्रित है।
DDM क्या है?
डिविडेंड डिस्काउंट मॉडल (Dividend Discount Model - DDM) एक प्रकार का इन्ट्रिंसिक वैल्यूएशन (intrinsic valuation) है जिसका उपयोग किसी कंपनी के फेयर वैल्यू (fair value) का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है, जो उसके भविष्य के डिविडेंड पेमेंट्स (dividend payments) पर आधारित होता है। यह इस सिद्धांत पर काम करता है कि किसी स्टॉक का मूल्य उसके सभी अपेक्षित भविष्य के डिविडेंड्स के वर्तमान मूल्य के बराबर होता है। यह विधि विशेष रूप से उन कंपनियों के मूल्यांकन के लिए उपयोगी है जो स्थिर और पूर्वानुमानित डिविडेंड्स का भुगतान करती हैं, जैसे कि बड़े बैंक, FMCG कंपनियां, और यूटिलिटीज।
बेसिक फॉर्मूला:
स्टॉक का मूल्य = D1 / (r - g)
जहां:
- D1 = अगले साल अपेक्षित डिविडेंड
- r = अपेक्षित रिटर्न रेट (required rate of return) (या डिस्काउंट रेट - discount rate)
- g = डिविडेंड ग्रोथ रेट (dividend growth rate)
उदाहरण: मान लीजिए कि हिंदुस्तान यूनिलीवर अगले साल ₹20 का डिविडेंड देने की उम्मीद है। यदि डिविडेंड के 6% वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है और आपका अपेक्षित रिटर्न रेट 10% है, तो DDM का उपयोग करके स्टॉक का फेयर वैल्यू होगा:
तो, मॉडल के अनुसार, शेयर का फेयर वैल्यू ₹500 है।
DDM कहां सबसे उपयोगी है?
- कंपनियां जिनका लगातार डिविडेंड-पेइंग इतिहास है
- वित्तीय क्षेत्र के स्टॉक्स जैसे कि बैंक और इंश्योरेंस फर्म्स
- ब्लू-चिप कंपनियां जिनकी सीमित पुनर्निवेश आवश्यकताएं हैं
DDM की सीमाएं:
- उन कंपनियों के लिए उपयोगी नहीं है जो डिविडेंड का भुगतान नहीं करती हैं
- ग्रोथ रेट और डिस्काउंट रेट की धारणाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील
- बायबैक या कैपिटल एप्रिसिएशन (capital appreciation) को ध्यान में नहीं रखता
कई निवेशक ITC, कोल इंडिया या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों जैसी कंपनियों का मूल्यांकन करने के लिए DDM का उपयोग करते हैं — ऐसी फर्म्स जो स्थिर डिविडेंड नीतियों और पूर्वानुमानित भुगतान पैटर्न की पेशकश करती हैं।
डिविडेंड डिस्काउंट मॉडल (Dividend Discount Model) एक आम के पेड़ का मूल्यांकन करने जैसा काम करता है जो आपको नियमित रूप से खिलाता है। अगर वह स्ट्रीम स्थिर है और बढ़ने की संभावना है, तो पेड़ अधिक मूल्यवान हो जाता है। अगले अध्याय में, हम कंपरेबल कंपनी एनालिसिस (Comparable Company Analysis - CCA) देखेंगे — एक रिलेटिव वैल्यूएशन तकनीक (relative valuation technique) जो आपकी कंपनी की तुलना उसी उद्योग की अन्य कंपनियों से करती है।
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