
Chapter 4 | 2 min read
लीवरेज रेशियोज़: डेट-टू-इक्विटी (debt-to-equity) और डेट-टू-एसेट (debt-to-asset) कैलकुलेशन (calculation)
लेवरेज रेशियो (leverage ratios) महत्वपूर्ण फाइनेंशियल मेट्रिक्स (financial metrics) हैं जो किसी कंपनी की अपनी दीर्घकालिक वित्तीय दायित्वों को पूरा करने की क्षमता का आकलन करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये रेशियो दिखाते हैं कि कंपनी ने अपनी इक्विटी या कुल एसेट्स (assets) की तुलना में कितना कर्ज़ लिया है। इस चैप्टर में, हम दो मुख्य लेवरेज रेशियो—डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) और डेट-टू-एसेट रेशियो (Debt-to-Asset Ratio)—पर ध्यान केंद्रित करेंगे और एक्सेल (Excel) का उपयोग करके उन्हें कैसे कैलकुलेट करें।
लेवरेज रेशियो क्या हैं?
लेवरेज रेशियो (leverage ratios) यह मापते हैं कि कंपनी अपने एसेट्स और ऑपरेशन्स को फाइनेंस (finance) करने के लिए कितने कर्ज़ पर निर्भर है। उच्च लेवरेज का मतलब उच्च रिस्क (risk) हो सकता है, लेकिन यह मजबूत ग्रोथ पोटेंशियल (growth potential) का संकेत भी दे सकता है। ये रेशियो निवेशकों, क्रेडिटर्स, और विश्लेषकों के लिए कंपनी की वित्तीय संरचना को निर्धारित करने के लिए आवश्यक हैं।
डेट-टू-इक्विटी रेशियो
डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) कंपनी के कुल कर्ज़ की तुलना उसके कुल इक्विटी से करता है। यह दिखाता है कि कंपनी ने अपने एसेट्स को फाइनेंस करने के लिए कितना कर्ज़ लिया है और यह शेयरहोल्डर्स की इक्विटी के सापेक्ष कितना है। उच्च रेशियो का मतलब है कि कंपनी अधिक लेवरेज्ड है और संभावित रूप से अधिक जोखिमपूर्ण है।
डेट-टू-इक्विटी रेशियो के लिए फॉर्मूला:
डेट-टू-इक्विटी रेशियो = कुल कर्ज़ / शेयरहोल्डर्स की इक्विटी
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: एक्सेल में डेट-टू-इक्विटी रेशियो कैलकुलेट करना
स्टेप 1: डेटा इनपुट करें
मान लीजिए निम्नलिखित वित्तीय डेटा हैं:
- कुल कर्ज़ = ₹800,000
- शेयरहोल्डर्स की इक्विटी = ₹500,000
₹800,000 | ₹500,000 |
स्टेप 2: डेट-टू-इक्विटी रेशियो फॉर्मूला अप्लाई करें
एक्सेल में, फॉर्मूला है:
=कुल कर्ज़ / शेयरहोल्डर्स की इक्विटी
इस उदाहरण के लिए:
=800000 / 500000

परिणाम: डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) 1.6 है।
इसका मतलब है कि हर ₹1 इक्विटी के लिए, कंपनी के पास ₹1.60 डेट है, यानी यह कंपनी ज्यादा लीवरेज्ड (leveraged) है।
डेट-टू-एसेट रेशियो (Debt-to-Asset Ratio)
डेट-टू-एसेट रेशियो (Debt-to-Asset Ratio) यह मापता है कि कंपनी की कुल संपत्ति का कितना प्रतिशत डेट के द्वारा फाइनेंस्ड (financed) है। यह रेशियो यह दिखाता है कि कंपनी की कितनी संपत्ति क्रेडिटर्स (creditors) के स्वामित्व में है।
डेट-टू-एसेट रेशियो के लिए फॉर्मूला (Formula for Debt-to-Asset Ratio): डेट-टू-एसेट रेशियो = कुल डेट (Total Debt) / कुल एसेट्स (Total Assets)
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: एक्सेल में डेट-टू-एसेट रेशियो कैलकुलेट करना (Step-by-Step Guide: Calculating Debt-to-Asset Ratio in Excel)
स्टेप 1: डेटा इनपुट करें (Step 1: Input Data)
मान लीजिए कंपनी की कुल संपत्ति ₹1,200,000 है।
कुल डेट (Total Debt) कुल एसेट्स (Total Assets) ₹800,000 ₹1,200,000
स्टेप 2: डेट-टू-एसेट रेशियो फॉर्मूला लागू करें (Step 2: Apply the Debt-to-Asset Ratio Formula)
एक्सेल में, फॉर्मूला होगा:
=कुल डेट (Total Debt) / कुल एसेट्स (Total Assets)
इस उदाहरण के लिए:
=800000 / 1200000

परिणाम: डेट-टू-एसेट रेशियो (debt-to-asset ratio) 0.67, या 67% है।
इसका मतलब है कि कंपनी के 67% एसेट्स (assets) डेट (debt) के माध्यम से फाइनेंस (finance) किए गए हैं, जो कि एक मध्यम स्तर का लीवरेज (leverage) दर्शाता है।
लीवरेज रेशियो का उपयोग क्यों करें? (Why Use Leverage Ratios?)
- फाइनेंशियल रिस्क का आकलन करें: लीवरेज रेशियोज़ (leverage ratios) यह दिखाकर कंपनी की जोखिम को मूल्यांकित करने में मदद करते हैं कि वह कितना डेट (debt) पर निर्भर है।
- फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को समझें: ये रेशियोज़ (ratios) यह जानकारी देते हैं कि कंपनी की ग्रोथ (growth) कितनी डेट (debt) बनाम इक्विटी (equity) से फंड (fund) की गई है।
- इन्वेस्टर और लेंडर का विश्वास: उच्च लीवरेज (leverage) इन्वेस्टर्स (investors) और लेंडर्स (lenders) के लिए चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन अगर इसे सही से मैनेज (manage) किया जाए तो यह ग्रोथ ऑपर्च्युनिटीज़ (growth opportunities) का संकेत भी हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Takeaways):
- डेट-टू-इक्विटी रेशियो (debt-to-equity ratio) यह दिखाता है कि शेयरहोल्डर्स की इक्विटी (equity) के मुकाबले डेट (debt) का अनुपात कितना है।
- डेट-टू-एसेट रेशियो (debt-to-asset ratio) यह संकेत देता है कि कंपनी के एसेट्स (assets) का कितना हिस्सा डेट (debt) से फाइनेंस (finance) किया गया है।
- एक्सेल (Excel) इन गणनाओं को सरल बनाता है, जिससे आप किसी कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ (financial health) का जल्दी और सटीकता से विश्लेषण कर सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion):
लीवरेज रेशियोज़ (leverage ratios), जैसे कि डेट-टू-इक्विटी (debt-to-equity) और डेट-टू-एसेट (debt-to-asset) रेशियो, एक कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (financial stability) और रिस्क प्रोफाइल (risk profile) में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। एक्सेल (Excel) का उपयोग करके इन रेशियोज़ (ratios) की गणना करके, आप यह प्रभावी रूप से मूल्यांकन कर सकते हैं कि कंपनी के एसेट्स (assets) या इक्विटी (equity) की तुलना में वह कितना डेट (debt) ले रही है।
अगले अध्याय का पूर्वावलोकन (Next Chapter Preview): अगले अध्याय में, हम एक्टिविटी रेशियोज़ (activity ratios) को कवर करेंगे, जिसमें एसेट टर्नओवर रेशियो (asset turnover ratio) और इन्वेंटरी टर्नओवर (inventory turnover) पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ये रेशियोज़ (ratios) यह आकलन करने में मदद करते हैं कि एक कंपनी अपने एसेट्स (assets) का कितनी कुशलता से उपयोग करती है और अपनी इन्वेंटरी (inventory) को कैसे मैनेज करती है। ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) पर अधिक जानकारी के लिए बने रहें!
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