
Chapter 3 | 3 min read
कैलेंडर स्प्रेड रणनीति (Calendar Spread Strategy)
हमारी पिछली बातचीत में आयरन बटरफ्लाई स्ट्रैटेजी (Iron Butterfly Strategy) पर हमने चरण-दर-चरण तरीके से चर्चा की थी कि कैसे व्यक्ति सीमित जोखिम के साथ रेंज-बाउंड मार्केट्स (range-bound markets) में लाभ कमा सकता है, एक मूल्य बिंदु को लक्षित करके। आज, हम कैलेन्डर स्प्रेड स्ट्रैटेजी (Calendar Spread Strategy) की ओर बढ़ रहे हैं - यह एक समय-परखे हुए तरीका है जो समय क्षय (time decay) और अस्थिरता के अंतर को उन व्यापारियों के लिए लाभ उठाएगा जो मार्केट्स के स्थिर रहने या हल्की प्रवृत्ति दिखाने की उम्मीद रखते हैं। अब, चलिए विस्तार से समझते हैं।
कैलेन्डर स्प्रेड स्ट्रैटेजी क्या है?
कैलेन्डर स्प्रेड, जिसे समय स्प्रेड भी कहा जाता है, एक उन्नत ऑप्शन ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी है जिसमें:
- आप एक दीर्घकालिक ऑप्शन खरीदते हैं (दूर की समाप्ति)।
- आप एक अल्पकालिक ऑप्शन बेचते हैं (नजदीकी समाप्ति)।
दोनों कॉल्स का स्ट्राइक प्राइस समान होता है लेकिन समाप्ति तिथि अलग होती है। यह रणनीति समय क्षय 'थीटा' (Theta) पर निर्भर करती है और अस्थिरता बढ़ने पर लाभ देती है। इसका उद्देश्य तब लाभ कमाना है जब अंतर्निहित संपत्ति जैसे निफ्टी (Nifty) या बैंक निफ्टी (Bank Nifty) ऑप्शन्स के स्ट्राइक प्राइस के पास रहती है क्योंकि अल्पकालिक ऑप्शन की वैल्यू तेजी से घटती है।

ट्रेडर्स इसे क्यों चुनते हैं
भारतीय शेयर बाजार अपने बार-बार की समाप्तियों और इवेंट-ड्रिवन वोलैटिलिटी (volatility) के कारण कैलेंडर स्प्रेड्स (Calendar Spreads) के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। यहां बताया गया है कि ट्रेडर्स इस रणनीति को क्यों पसंद करते हैं:
1. सीमित जोखिम: अधिकतम नुकसान उस नेट डेबिट (net debit) तक सीमित होता है जो ट्रेड सेट करने के लिए दिया जाता है।
2. वोलैटिलिटी खेल: यह आमतौर पर इवेंट्स जैसे कि अर्निंग्स या आरबीआई (RBI) घोषणाओं के पहले इम्प्लाइड वोलैटिलिटी (implied volatility) में वृद्धि पर लाभ कमाने को शामिल करता है।
3. अनुकूलता: यह न्यूट्रल बाजारों में अच्छी तरह से काम करता है लेकिन इसे हल्के बुलिश (bullish) या बियरिश (bearish) ट्रेंड्स के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
कैलेंडर स्प्रेड का उपयोग कब करें?
कैलेंडर स्प्रेड निम्नलिखित परिस्थितियों में सबसे अच्छा काम करता है:
1. कम वोलैटिलिटी अवधि: जब वोलैटिलिटी कम होती है और इसके बढ़ने की उम्मीद होती है, तब इस रणनीति को शुरू करना चाहिए।
2. प्री-इवेंट सेटअप: इसे प्रमुख इवेंट्स जैसे मौद्रिक नीति निर्णय या अर्निंग्स रिलीज से पहले उपयोग करें।
3. न्यूट्रल या हल्के ट्रेंड्स: यह एक आदर्श स्थिति है जब आप उम्मीद करते हैं कि अंतर्निहित संपत्ति (underlying asset) एक विशेष मूल्य स्तर के आसपास बनी रहेगी।
इसे कैसे सेट करें: एक उदाहरण
मान लीजिए कि निफ्टी 19,600 पर ट्रेड कर रहा है और आप उम्मीद करते हैं कि यह स्तर आने वाले सप्ताह के लिए बना रहेगा। यहां बताया गया है कि कैलेंडर स्प्रेड कैसे बनाएं:
-
लंबी अवधि का निफ्टी 19,600 कॉल खरीदें (जैसे, दो सप्ताह में समाप्ति)।
-
छोटी अवधि का निफ्टी 19,600 कॉल बेचें (जैसे, इस सप्ताह समाप्ति)।
यह सेटअप इसलिए काम करता है क्योंकि:
- छोटी अवधि का ऑप्शन तेजी से क्षयित होता है, जिससे आपको प्राप्त प्रीमियम (premium) में से अधिक रखने की अनुमति मिलती है।
- इसका मतलब है कि इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में वृद्धि लंबे समय के ऑप्शन की कीमत बढ़ाने में मदद करती है।
प्रमुख लाभ
1. समय क्षय लाभ: इस छोटी अवधि के ऑप्शन के तेजी से क्षय से लाभ प्राप्त करें।
2. वोलैटिलिटी बूस्ट: बढ़ी हुई इम्प्लाइड वोलैटिलिटी लंबे समय के ऑप्शन को काफी अधिक मदद करती है।
3. कम पूंजी आवश्यकता: इसका मतलब है कि यह कम जोखिम वाली रणनीति है जो छोटे खातों के लिए भी अच्छी तरह से काम करती है।
जोखिमों पर ध्यान दें
जबकि कैलेंडर स्प्रेड्स अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले होते हैं, स्ट्राइक प्राइस (strike price) से दूर तीव्र मूल्य आंदोलनों से लाभप्रदता कम हो सकती है। इसके अलावा, इम्प्लाइड वोलैटिलिटी में गिरावट लंबे समय के ऑप्शन के मूल्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
कैलेंडर स्प्रेड रणनीति समय क्षय और वोलैटिलिटी डायनामिक्स (volatility dynamics) से अधिकतम लाभ प्राप्त करने का एक शानदार तरीका हो सकता है। चाहे वह निफ्टी हो, बैंक निफ्टी हो, या व्यक्तिगत शेयर हों, यह स्थिर बाजारों के लिए एक लचीला और नियंत्रित जोखिम दृष्टिकोण है। यदि कैलेंडर स्प्रेड रणनीति ने आपको मोहित किया है, तो हमारी अगली चर्चा का विषय, वर्टिकल स्प्रेड रणनीति (Vertical Spread Strategy) है जो आपको ट्रेडिंग के लिए एक सरल, फिर भी बहुमुखी दृष्टिकोण से परिचित कराती है। दिशा-निर्देश बाजार विचारों के लिए आदर्श, यह जोखिम को नियंत्रित करते हुए निरंतर रिटर्न को लक्षित करने के लिए एक आवश्यक रणनीति है।
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