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Module 7
कॉरपोरेट एक्शंस (corporate actions) और इसके प्रकार क्या हैं?
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Chapter 5 | 3 min read

स्टॉक स्प्लिट (stock split) क्या है?

पाई को स्लाइस करना: स्टॉक स्प्लिट्स कैसे स्टॉक्स को अधिक आकर्षक बनाते हैं

सोचो एक स्वादिष्ट पिज़्ज़ा - एक कंपनी का स्टॉक - जिसे कुछ ही लोग खरीद सकते हैं। एक स्टॉक स्प्लिट वैसा ही है जैसे उस पिज़्ज़ा को छोटे-छोटे हिस्सों में काटना, जिससे यह अधिक संख्या में निवेशकों के लिए सुलभ हो जाता है। निवेश की दुनिया में, एक स्टॉक स्प्लिट एक रणनीतिक कदम होता है जिसमें कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को अधिक संख्या में शेयरों में विभाजित करती है, जिससे व्यक्तिगत शेयर की कीमत प्रभावी रूप से कम हो जाती है।

इस अध्याय में, हम स्टॉक स्प्लिट्स की दुनिया में गहराई से उतरेंगे, यह समझेंगे कि वे कैसे काम करते हैं, उनका शेयरधारकों पर क्या प्रभाव पड़ता है, और प्रमुख भारतीय कंपनियों के वास्तविक जीवन के उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।

स्टॉक स्प्लिट एक कॉर्पोरेट एक्शन है जिसमें एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को अधिक संख्या में शेयरों में विभाजित करती है। इसे ऐसे समझो जैसे एक बड़े केक को छोटे टुकड़ों में काटना। प्रत्येक शेयरधारक को अधिक शेयर मिलते हैं, लेकिन उनकी होल्डिंग्स का कुल मूल्य वही रहता है। यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) (सभी आउटस्टैंडिंग शेयरों का कुल मूल्य) स्थिर रहता है। जबकि शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, प्रति शेयर कीमत उसी अनुपात में नीचे समायोजित की जाती है जिससे कुल मूल्य वही रहे।

उदाहरण के लिए, 2-for-1 स्टॉक स्प्लिट में:

यदि आपके पास 100 शेयर हैं जो INR 100 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे हैं (कुल मूल्य: INR 10,000),

स्प्लिट के बाद, आपको 200 शेयर मिलेंगे (प्रत्येक की कीमत INR 50 प्रति शेयर), कुल मूल्य INR 10,000 रहेगा।

यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं कि कंपनियां स्टॉक स्प्लिट्स क्यों करती हैं:

1) बढ़ी हुई सुलभता (Increased Accessibility): शेयर की कीमत कम करने से स्टॉक व्यापक रेंज के निवेशकों के लिए अधिक सुलभ हो जाता है, जिससे बाजार सहभागिता में वृद्धि हो सकती है।

2) बढ़ी हुई लिक्विडिटी (Enhanced Liquidity): आउटस्टैंडिंग शेयरों की संख्या बढ़ाकर, स्टॉक स्प्लिट्स स्टॉक की लिक्विडिटी में सुधार कर सकते हैं। अधिक शेयर उपलब्ध होने पर, निवेशकों के लिए शेयर खरीदना और बेचना आसान हो जाता है, जिससे एक अधिक सक्रिय बाजार को बढ़ावा मिलता है।

3) बाजार की धारणा (Market Perception): कम शेयर कीमत संभावित निवेशकों के लिए स्टॉक को अधिक आकर्षक बना सकती है। यह मनोवैज्ञानिक कारक कभी-कभी मांग में वृद्धि और स्टॉक की कीमत पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

4) आत्मविश्वास का संकेत (Signal of Confidence): स्टॉक स्प्लिट्स करने वाली कंपनियां अपने भविष्य के विकास संभावनाओं और वित्तीय स्थिरता के बारे में आत्मविश्वास का संकेत दे सकती हैं। यह कंपनी की दीर्घकालिक क्षमता में निवेशकों के विश्वास को बढ़ा सकता है।

  • आईटीसी लिमिटेड (ITC Ltd.): 2016 में, आईटीसी लिमिटेड ने 1:2 स्टॉक स्प्लिट किया, जिससे उनके INR 10 फेस वैल्यू शेयर अधिक सुलभ हो गए (2 शेयरों में INR 5 फेस वैल्यू प्रत्येक के साथ विभाजित)। इससे बाजार सहभागिता और लिक्विडिटी बढ़ी।
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS): 2018 में, टीसीएस ने 1:1 स्टॉक स्प्लिट की घोषणा की, जिससे शेयरों की संख्या दोगुनी हो गई और शेयर की कीमत आधी हो गई। यह कदम, जो उनकी मजबूत विकास प्रक्षेपवृत्ति को दर्शाता है, बाजार द्वारा अच्छी तरह से स्वीकार किया गया।
  • एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank): 2019 में, एचडीएफसी बैंक के 1:2 स्टॉक स्प्लिट ने शेयर की कीमत को कम कर दिया, जिससे यह खुदरा निवेशकों के लिए अधिक सुलभ हो गया। बढ़ी हुई सुलभता और लिक्विडिटी ने बाजार भावना पर सकारात्मक प्रभाव डाला।

हालांकि स्टॉक स्प्लिट्स सीधे आपके निवेश के मूल्य को नहीं बदलते, लेकिन उनके शेयरधारकों पर कुछ प्रमुख प्रभाव होते हैं:

1) बढ़ी हुई शेयर संख्या (Increased Number of Shares): शेयरधारकों को अतिरिक्त शेयर मिलते हैं, जिससे उनकी कुल होल्डिंग्स बढ़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, 2-for-1 स्प्लिट में, यदि आपके पास 100 शेयर हैं, तो आपको अतिरिक्त 100 शेयर मिलेंगे, जिससे कुल 200 शेयर हो जाएंगे।

2) समायोजित शेयर कीमत (Adjusted Share Price): शेयर की कीमत स्प्लिट अनुपात के अनुसार नीचे समायोजित की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई स्टॉक INR 1000 पर ट्रेड कर रहा है और वे 2-for-1 स्प्लिट करते हैं, तो नई शेयर कीमत INR 500 होगी।

3) बाजार मूल्य में कोई परिवर्तन नहीं (No Change in Market Value): याद रखें, आपके निवेश का कुल मूल्य वही रहता है। जबकि शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, शेयरों का कुल मूल्य अपरिवर्तित रहता है।

4) बढ़ी हुई लिक्विडिटी (Enhanced Liquidity): बढ़ी हुई शेयर संख्या एक अधिक लिक्विड बाजार का नेतृत्व कर सकती है, जिससे आपके शेयर खरीदना या बेचना आसान हो जाता है।

केस स्टडी: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), भारत की प्रमुख आईटी सेवाएं देने वाली कंपनियों में से एक, ने 2018 में 1:1 स्टॉक स्प्लिट किया। इस स्प्लिट ने प्रत्येक शेयरधारक द्वारा रखे गए शेयरों की संख्या को दोगुना कर दिया और शेयर की कीमत को आधा कर दिया। स्टॉक स्प्लिट ने टीसीएस शेयरों को खुदरा निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बना दिया और बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाई। सकारात्मक बाजार प्रतिक्रिया ने टीसीएस की विकास संभावनाओं और वित्तीय स्थिरता में निवेशकों के विश्वास को दर्शाया।

निष्कर्ष (Conclusion)

स्टॉक स्प्लिट्स कंपनियों के लिए अपने शेयरों को अधिक सुलभ बनाने और बाजार की लिक्विडिटी बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका हैं। शेयरों की संख्या बढ़ाकर और शेयर की कीमत को समायोजित करके, कंपनियां एक व्यापक रेंज के निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं और बाजार गतिविधि को बढ़ावा दे सकती हैं। अगला, हम एक अन्य महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट एक्शन: शेयरों की बाय-बैक (buy-back) को एक्सप्लोर करेंगे। जुड़े रहें!!

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