
Chapter 1 | 3 min read
रिस्क फ्री इंटरेस्ट रेट (risk free interest rate) की अवधारणा को समझना
जब बात आती है अपने पैसे को बचाने की, हममें से ज्यादातर लोग ऐसा विकल्प चुनते हैं जो सुरक्षित हो और फिर भी एक उचित रिटर्न दे। इतिहास के दौरान, लोगों ने अपने धन को बढ़ाने के सुरक्षित तरीके खोजे हैं, चाहे वह नकद छुपाना हो या सोना दफनाना। इस सुरक्षा की खोज हमें एक महत्वपूर्ण विचार के पास ले जाती है जिसे रिस्क-फ्री इंटरेस्ट रेट (risk-free interest rate) कहा जाता है—यह एक ऐसा बुनियादी विचार है जो निवेशकों को यह निर्धारित करने में मदद करता है कि उनके पैसे को बढ़ाने के लिए सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है।
रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न (Risk-free Rate of Return) क्या है?
रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न (risk-free rate of return) उस निवेश के सैद्धांतिक रिटर्न को संदर्भित करता है जिसमें वित्तीय हानि का कोई जोखिम नहीं होता। सरल शब्दों में, यह वह रिटर्न है जिसकी आप अपेक्षा कर सकते हैं कि एक ऐसे निवेश से अर्जित होगा जो जोखिम से मुक्त हो। हालांकि कोई भी निवेश वास्तव में जोखिम-मुक्त नहीं होता, कुछ सरकारी सिक्योरिटीज़ जैसे ट्रेजरी बिल्स (Treasury bills) को उनके अत्यधिक कम डिफॉल्ट रिस्क के कारण अक्सर प्रॉक्सी के रूप में उपयोग किया जाता है।
रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न को प्रभावित करने वाले कारक
तीन मुख्य कारक रिस्क-फ्री रेट को प्रभावित करते हैं: इन्फ्लेशन (inflation), रेंटल रेट (rental rate), और इन्वेस्टमेंट रिस्क (investment risk)। इन कारकों को समझना यह समझने की कुंजी है कि रिस्क-फ्री रेट को कैसे निर्धारित किया जाता है और यह समय के साथ क्यों बदलता है।
1. इन्फ्लेशन (Inflation):
इन्फ्लेशन (inflation) का मतलब है समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि। जैसे ही इन्फ्लेशन बढ़ता है, पैसे की पर्चेज़िंग पावर (purchasing power) घट जाती है। रिस्क-फ्री इन्वेस्टमेंट्स (risk-free investments) पर विचार करते समय, रिस्क-फ्री रेट को इन्फ्लेशन का हिसाब रखना चाहिए ताकि रियल रिटर्न (real return) (इन्फ्लेशन के बाद) सकारात्मक बना रहे। इसका मतलब है कि रिस्क-फ्री रेट में आमतौर पर अपेक्षित इन्फ्लेशन की भरपाई के लिए एक प्रीमियम शामिल होता है।
2. रेंटल रेट (Rental Rate):
रेंटल रेट (rental rate) एक रिस्क-फ्री इन्वेस्टमेंट (risk-free investment) पर वास्तविक रिटर्न है। सरकारी सिक्योरिटीज़ जैसे ट्रेजरी बिल्स (Treasury bills) के लिए, यह निवेशकों को प्राप्त होने वाले पूर्वानुमानित इंटरेस्ट पेमेंट (interest payment) को संदर्भित करता है। यह रिटर्न, बिना किसी डिफॉल्ट रिस्क (default risk) के भुगतान किया जाता है, जो रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) की आधारशिला बनता है।
3. इन्वेस्टमेंट रिस्क (Investment Risk):
इन्वेस्टमेंट रिस्क (investment risk) अधिकांश निवेशों में निहित संभावित मूल्य हानि को संदर्भित करता है। हालांकि, रिस्क-फ्री इन्वेस्टमेंट्स (risk-free investments) (जैसे सरकारी बांड्स) के साथ, यह रिस्क (risk) नगण्य माना जाता है, जिसका अर्थ है कि अपेक्षित रिटर्न गारंटीड है, जो अन्य निवेशों से रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) को अलग करता है।
रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न की गणना (Calculating the Risk-free Rate of Return)
रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) आमतौर पर शॉर्ट-टर्म सरकारी सिक्योरिटीज़ (short-term government securities), जैसे ट्रेजरी बिल्स (Treasury bills) के रिटर्न से प्राप्त किया जाता है। इन सिक्योरिटीज़ को लगभग रिस्क-फ्री (risk-free) माना जाता है क्योंकि सरकार द्वारा समर्थन किया जाता है।
1. पारंपरिक गणना (Traditional Calculation):
रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) की गणना शॉर्ट-टर्म सरकारी सिक्योरिटीज़ (short-term government securities) द्वारा पेश किए गए इंटरेस्ट रेट (interest rate) के आधार पर की जाती है। इन सिक्योरिटीज़ पर इंटरेस्ट रेट (interest rate) वह रिटर्न प्रस्तुत करता है जिसे आप बिना रिस्क (risk) लिए कमा सकते हैं।
2. अधिक विस्तृत दृष्टिकोण के लिए CAPM का उपयोग (Using CAPM for a More Detailed Approach):
कैपिटल एसेट प्राइसिंग मॉडल (Capital Asset Pricing Model) (CAPM) का उपयोग रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) का आकलन करने के लिए किया जा सकता है, जिसमें मार्केट रिटर्न्स (market returns) और एक सिक्योरिटी के विशिष्ट रिस्क (specific risks) को शामिल किया जाता है। फॉर्मूला है:
Ra = Rf + [Ba x (Rm - Rf)]
फॉर्मूला के प्रत्येक भाग का मतलब है:
- Ra: किसी विशेष सिक्योरिटी पर वास्तविक रिटर्न (real return)।
- Rf: रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate)। यह वह आधार रिटर्न है जो आपको एक व्यावहारिक रूप से रिस्क-फ्री इन्वेस्टमेंट (risk-free investment) से मिलता है, जैसे कि सरकारी बांड (government bond)।
- Ba: बीटा (beta) मापता है कि एक सिक्योरिटी की कीमत मार्केट के सापेक्ष कितनी चलती है। बीटा 1 का मतलब है कि सिक्योरिटी मार्केट के साथ चलती है। 1 से अधिक बीटा का मतलब है कि यह मार्केट से अधिक वोलेटाइल (volatile) है, और 1 से कम बीटा का मतलब है कि यह कम वोलेटाइल (volatile) है।
- Rm: यह मार्केट से अपेक्षित औसत रिटर्न (average return) है।
रिस्क प्रीमियम (Risk Premium)
रिस्क प्रीमियम (risk premium) वह अतिरिक्त रिटर्न है जिसकी उम्मीद निवेशक एक रिस्की इन्वेस्टमेंट (risky investment) से रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) से ऊपर कमाने की करते हैं। इसे इस प्रकार गणना किया जाता है:
रिस्क प्रीमियम = Rm – Rf
CAPM फॉर्मूला इन तत्वों को मिलाकर दिखाता है कि एक सिक्योरिटी पर अपेक्षित रिटर्न (expected return) इसके बीटा और रिस्क प्रीमियम द्वारा कैसे प्रभावित होता है। मूलतः, यह निवेशकों को यह समझने में मदद करता है कि एक निवेश के अपेक्षित रिटर्न (expected returns) और इसके मार्केट की तुलना में रिस्क (risk) के बीच क्या संबंध है।
निवेशकों के लिए रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न का महत्व (Importance of the Risk-free Rate of Return for Investors)
रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) आधार रिटर्न (baseline return) के रूप में कार्य करता है—कोई भी इन्वेस्टमेंट (investment) जो थोड़ी भी मात्रा में रिस्क (risk) रखता है, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उच्च रिटर्न (higher return) की पेशकश करनी चाहिए। यह विभिन्न निवेश विकल्पों की तुलना करने के लिए एक मानक के रूप में कार्य करता है और अन्य वित्तीय मेट्रिक्स (financial metrics) जैसे इक्विटी की लागत (cost of equity) और डेब्ट की लागत (cost of debt) की गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कंपनियों के लिए संभावित प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करते समय, रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) को एक बेंचमार्क के रूप में उपयोग किया जाता है। कंपनियाँ प्रोजेक्ट्स से अपेक्षित रिटर्न्स (expected returns) की तुलना रिस्क-फ्री रेट (risk-free rate) से करती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निवेश संबंधित रिस्क (risks) को सही ठहराता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मूल रूप से, रिस्क-फ्री रेट ऑफ रिटर्न (risk-free rate of return) निवेशकों के लिए "नॉर्थ स्टार" है—यह आपको सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मार्गदर्शन करने में मदद करता है। इस रेट को आकार देने वाले प्रमुख कारकों को समझकर, जैसे इन्फ्लेशन (inflation), रेंटल रेट्स (rental rates), और इन्वेस्टमेंट रिस्क (investment risk) का अभाव, आप यह तय करने में अधिक सूचित निर्णय ले सकते हैं कि अपने पैसे को कहाँ रखा जाए।
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