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Stockshaala
Chapter 4 | 3 min read
पोजिशन साइजिंग (position sizing)
दोनों ट्रेडर्स के पास ₹5,00,000 के अकाउंट्स हैं। वे एक ही सेटअप लेते हैं — एंट्री ₹500 पर और स्टॉप ₹482 पर। ट्रेडर A का साइजिंग विश्वास पर आधारित है: सेटअप बहुत अच्छा दिखता है, इसलिए वे ₹1.5 लाख लगाते हैं। ट्रेडर B का साइजिंग रिस्क (risk) पर आधारित है: स्टॉप ₹18 दूर है, इसलिए वे कैलकुलेट करते हैं कि कितने शेयर उन्हें कैपिटल (capital) के 1% के भीतर रखते हैं।
ट्रेड हार जाता है। ट्रेडर A ₹30,000 नीचे है — उनके अकाउंट का 6% — एक सिंगल ट्रेड पर। ट्रेडर B ₹5,000 नीचे है, जो 1% है। ट्रेडर A को ब्रेक इवन (break even) के लिए 6.4% बनाना होगा। ट्रेडर B को 1.05%। दोनों ने एक ही गलती की। एक आसानी से रिकवर कर सकता है। दूसरे के पास एक गंभीर समस्या है।
इस अध्याय के अंत तक, आप सक्षम होंगे:
- फिक्स्ड परसेंटेज रिस्क मॉडल (fixed percentage risk model) का उपयोग करके पोजीशन साइज (position size) की गणना करना।
- किसी भी सेटअप पर फॉर्मूला अप्लाई करना जहां एंट्री प्राइस और स्टॉप लॉस लेवल ज्ञात हो।
- यह समझाना कि विश्वास के बजाय रिस्क के आधार पर साइजिंग क्यों अकाउंट ब्लो-अप्स (account blow-ups) का मुख्य कारण है।
फिक्स्ड परसेंटेज रिस्क मॉडल (fixed percentage risk model)
फॉर्मूला के दो स्टेप्स हैं:
पहला: मैक्सिमम रिस्क अमाउंट (maximum risk amount) = अकाउंट साइज (account size) x रिस्क परसेंटेज (risk percentage)। ₹5,00,000 पर 1% रिस्क के लिए: मैक्सिमम रिस्क = ₹5,000।
दूसरा: पोजीशन साइज (position size) = मैक्सिमम रिस्क अमाउंट / स्टॉप डिस्टेंस (stop distance)। एंट्री ₹500 पर और स्टॉप ₹482 पर: स्टॉप डिस्टेंस = ₹18। पोजीशन साइज = ₹5,000 / ₹18 = 277 शेयर।
यह फॉर्मूला सुनिश्चित करता है कि हर ट्रेड निर्धारित कैपिटल के एक ही फ्रैक्शन (fraction) का रिस्क लेता है।
1% रिस्क प्रति ट्रेड पर, एक ट्रेडर 20 लगातार ट्रेड्स हार सकता है और फिर भी उनके कैपिटल का 82% सुरक्षित होगा।

बेस्ट उदाहरण इसे समझने के लिए: एक नगरपालिका जल बोर्ड शहर के पानी की सप्लाई रेज़रवॉयर कैपेसिटी (reservoir capacity) के आधार पर करता है, न कि प्रत्येक पड़ोस की प्यास के आधार पर। प्रत्येक क्षेत्र को उसके लिए निर्धारित फॉर्मूला के अनुसार अलॉटमेंट (allocation) मिलता है। एक क्षेत्र की अधिक मांग का मतलब यह नहीं है कि उसे दूसरे के खर्चे पर अधिक मिलेगा। पोजीशन साइजिंग (position sizing) आपके ट्रेडिंग कैपिटल (trading capital) के लिए वही अलॉटमेंट फॉर्मूला है।
नीचे दिए गए सभी तीन सेटअप्स ₹5,00,000 के अकाउंट के साथ 1% रिस्क (₹5,000 अधिकतम लॉस प्रति ट्रेड) और ₹500 के समान एंट्री लेवल का उपयोग करते हैं:
सेटअप A | 500 | 482 | ₹18 | 277 शेयर | ₹1,38,500 |
सेटअप B | 500 | 487 | ₹13 | 384 शेयर | ₹1,92,000 |
सेटअप C | 500 | 475 | ₹25 | 200 शेयर | ₹1,00,000 |
सामान्य गलतियाँ
गलती 1: ट्रेड्स में पोजीशन साइज बढ़ाना जो अधिक निश्चित लगते हैं
कोई निश्चित ट्रेड्स नहीं होते। कॉन्विक्शन (conviction) पर साइजिंग (sizing) एक्सपोजर को बढ़ा देती है, खासकर जब ओवरकॉन्फिडेंस (overconfidence) से ओवरसाइज्ड रिस्क (oversized risk) का खतरा होता है।
गलती 2: बड़े पोजीशन को जस्टिफाई करने के लिए वाइडर स्टॉप का उपयोग
यदि 1% रिस्क पर वांछित पोजीशन साइज के लिए स्टॉप डिस्टेंस बहुत बड़ा है, तो सही प्रतिक्रिया छोटी पोजीशन लेना है — न कि स्टॉप को आर्टिफिशियली (artificially) टाइट करना।
मुख्य बातें
- पोजीशन साइज = अधिकतम रिस्क (1% ऑफ ₹5,00,000 = ₹5,000) को स्टॉप डिस्टेंस से विभाजित करें। यह फॉर्मूला हर ट्रेड पर अप्लाई (apply) होता है।
- रिस्क के बजाय कॉन्विक्शन पर आधारित साइजिंग अकाउंट ब्लो-अप्स (account blow-ups) का प्राथमिक मैकेनिकल कारण है। सेटअप में आत्मविश्वास पोजीशन साइजिंग के लिए प्रासंगिक इनपुट नहीं है।
- वाइडर स्ट्रक्चरल स्टॉप अपने आप पोजीशन साइज को कम कर देता है। स्टॉप थीसिस (thesis) की सुरक्षा करता है। पोजीशन साइज अकाउंट की सुरक्षा करता है।
असाइनमेंट
अगले पाँच ट्रेड्स जिन्हें आप मूल्यांकन करेंगे — चाहे आप उन्हें लें या नहीं — पोजीशन साइज को फॉर्मूला: अधिकतम रिस्क को रुपए में स्टॉप डिस्टेंस से विभाजित करके कैलकुलेट (calculate) करें।
लिखें: एंट्री प्राइस, स्ट्रक्चरल स्टॉप लेवल, स्टॉप डिस्टेंस, और कैलकुलेटेड पोजीशन साइज। कैलकुलेटेड साइज की तुलना अपने गट (gut) से करें कि आपको कितना खरीदने का मन था। क्या आप सामान्यतः फॉर्मूला के सापेक्ष ओवर-साइजिंग या अंडर-साइजिंग कर रहे हैं?
रिस्क मैनेजमेंट के फंडामेंटल्स कवर करने के बाद, अगला मॉड्यूल वॉल्यूम एनालिसिस (volume analysis) पर जाएगा — जो टूल आपको बताता है कि मार्केट की प्राइस मूव्स में वास्तविक कॉन्विक्शन है या नहीं।
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