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Module 2
Key Commodities and Their Markets
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Chapter 3 | 4 min read

एग्रो कमोडिटीज़ (agro commodities): मुख्य प्रकार और डेरिवेटिव्स (derivatives)

आप एक किसान हैं जो गेहूं उगा रहे हैं। हर साल, मौसम, कीट और बाजार की मांग आपके फसल के दाम को प्रभावित करते हैं।

कीमतों के उतार-चढ़ाव से खुद को बचाने के लिए, आप एक कॉन्ट्रैक्ट में प्रवेश करते हैं ताकि आप अपनी गेहूं को फिक्स्ड प्राइस (fixed price) पर बेंच सकें, कई महीनों पहले फसल कटाई के। यह कॉन्ट्रैक्ट एक प्रकार का एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स (agro commodities derivative) है।

एग्रो कमोडिटीज, जिसमें गेहूं, मक्का, शक्कर और कॉफी जैसे कृषि उत्पाद शामिल होते हैं, वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और डेरिवेटिव्स उत्पादकों, उपभोक्ताओं और निवेशकों को रिस्क (risk) को हेज (hedge) करने और प्राइस मूवमेंट्स (price movements) पर स्पेकुलेट (speculate) करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट्स (financial contracts) होते हैं जो कृषि उत्पादों की कीमत से अपनी वेल्यू (value) प्राप्त करते हैं। इनमें फ्यूचर्स (futures), ऑप्शंस (options), और स्वैप्स (swaps) शामिल होते हैं जो मार्केट पार्टिसिपेंट्स (market participants) को प्राइस फ्लक्चुएशन्स (price fluctuations) के खिलाफ हेज या भविष्य के प्राइस मूवमेंट्स (price movements) पर स्पेकुलेट करने की अनुमति देते हैं। ये डेरिवेटिव्स आमतौर पर कमोडिटी एक्सचेंजेज (commodity exchanges) जैसे कि भारत में MCX (Multi Commodity Exchange) या वैश्विक स्तर पर CME ग्रुप (CME Group) पर ट्रेड किए जाते हैं।

1. अनाज कमोडिटीज (Cereal Commodities) (गेहूं, मक्का, चावल):
a. ये वे स्टेपल क्रॉप्स (staple crops) हैं जो वैश्विक खाद्य उत्पादन की रीढ़ बनाते हैं।
b. गेहूं और मक्का के फ्यूचर्स (futures) डेरिवेटिव्स मार्केट्स (derivatives markets) में सक्रिय रूप से ट्रेड किए जाते हैं, जहां किसान और ट्रेडर्स इन मार्केट्स का उपयोग प्राइस रिस्क (price risk) को मैनेज करने के लिए करते हैं।

2. तिलहन (Oilseeds) (सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों):
a. सोयाबीन फ्यूचर्स (futures) अमेरिका और भारत में एक प्रमुख एग्रो कमोडिटी (agro commodity) है, जिसमें सोयाबीन का एक बड़ा हिस्सा तेल और मील के लिए प्रोसेस किया जाता है। ये उत्पाद खाद्य और औद्योगिक उपयोगों में काम आते हैं।
b. मुख्य रूप से भारत में उत्पादित सरसों का तेल, कृषि उत्पादन के लिए कमोडिटी मार्केट्स (commodity markets) में व्यापक रूप से ट्रेड होता है।

3. सॉफ्ट कमोडिटीज (Soft Commodities) (शक्कर, कॉफी, कपास):
a. शक्कर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (futures contracts) ब्राज़ील और भारत जैसे देशों में लोकप्रिय हैं, जहां शक्कर एक प्रमुख फसल है।
b. कॉफी फ्यूचर्स (coffee futures) और कॉटन फ्यूचर्स (cotton futures) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ट्रेड होते हैं, जिनकी प्राइस मूवमेंट्स (price movements) मौसम की स्थिति, उत्पादन स्तर और वैश्विक मांग से प्रभावित होते हैं।

4. पशुधन (Livestock) (मवेशी, सूअर):
कैटल फ्यूचर्स (cattle futures) पशुधन बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिससे पशुपालक और मांस उत्पादक प्राइस फ्लक्चुएशन्स (price fluctuations) को मैनेज करने में सक्षम होते हैं। सूअरों और पोल्ट्री के लिए भी इसी तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स मौजूद हैं।

5. मसाले (Spices) (काली मिर्च, हल्दी, जीरा):
भारत में, हल्दी, काली मिर्च, और जीरा जैसे मसाले प्रमुख कृषि कमोडिटीज (agricultural commodities) हैं। इन उत्पादों के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस मार्केट्स (futures and options markets) भारतीय किसानों और ट्रेडर्स को अग्रिम में दाम लॉक करने में मदद करते हैं।

एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स मार्केट शारीरिक मांग (भोजन और कच्चे माल के लिए) और स्पेकुलेटिव इंटरेस्ट (speculative interest) दोनों से संचालित होता है। आइए एग्रो कमोडिटीज मार्केट में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख डेरिवेटिव्स पर नजर डालें:

1. फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (Futures Contracts):
फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स (futures contracts) पार्टिसिपेंट्स को यह सहमति करने की अनुमति देते हैं कि वे भविष्य की तारीख पर एक निर्धारित कीमत के लिए एक निश्चित मात्रा में एग्रो कमोडिटी खरीद या बेचेंगे। ये कॉन्ट्रैक्ट्स स्टैंडर्डाइज्ड (standardised) होते हैं, अर्थात् वे कमोडिटी की मात्रा, गुणवत्ता, और डिलीवरी डेट (delivery date) निर्दिष्ट करते हैं।

उदाहरण:
MCX पर एक गेहूं फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट (wheat futures contract) ट्रेडर्स को भविष्य में डिलीवरी के लिए आज सहमति की गई कीमत पर गेहूं खरीदने या बेचने की अनुमति देता है।

2. ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स (Options Contracts):
ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स (options contracts) खरीदारों को एक निश्चित तिथि से पहले एक निश्चित कीमत पर एग्रो कमोडिटी खरीदने या बेचने का अधिकार (लेकिन बाध्यता नहीं) देते हैं। इनका उपयोग अक्सर हेजर्स (hedgers) द्वारा प्रतिकूल प्राइस मूवमेंट्स (price movements) से बचाव के लिए किया जाता है।

3. कमोडिटी स्वैप्स (Commodity Swaps):
कमोडिटी स्वैप्स (commodity swaps) में एक एग्रीमेंट शामिल होता है जिसमें दो पार्टियां एक आधारभूत एग्रो कमोडिटी की कीमत पर कैश फ्लो (cash flows) का एक्सचेंज करने के लिए सहमत होती हैं। इनका उपयोग अक्सर कृषि उत्पादों के उत्पादकों और उपभोक्ताओं द्वारा प्राइस वोलेटिलिटी (price volatility) के खिलाफ हेज करने के लिए किया जाता है।

1. प्राइस वोलेटिलिटी से हेजिंग (Hedging Against Price Volatility):
एग्रो कमोडिटीज अक्सर मौसम, बीमारी, भू-राजनीतिक घटनाओं, और आपूर्ति और मांग में बदलाव जैसे कारणों से प्राइस फ्लक्चुएशन्स (price fluctuations) के अधीन होती हैं। डेरिवेटिव्स उत्पादकों (जैसे कि किसानों) और उपभोक्ताओं (जैसे कि खाद्य निर्माताओं) को दाम लॉक करने की अनुमति देते हैं, जिससे निश्चितता प्रदान होती है।

2. प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery):
एग्रो कमोडिटीज मार्केट्स प्राइस डिस्कवरी (price discovery) के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करते हैं, जहां कमोडिटीज की कीमत बाजार की ताकतों द्वारा निर्धारित होती है। यह उत्पादकों और ट्रेडर्स को वर्तमान और भविष्य की बाजार स्थितियों का अनुमान लगाने की अनुमति देता है।

3. निवेश और स्पेकुलेशन (Investment and Speculation):
निवेशक एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स का उपयोग कृषि बाजारों में एक्सपोजर हासिल करने और प्राइस मूवमेंट्स (price movements) पर स्पेकुलेट करने के लिए करते हैं। यह मुनाफे के अवसर प्रदान करता है, विशेषकर वोलेटाइल मार्केट्स (volatile markets) में।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है, जिससे एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स मार्केट भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। NCDEX (National Commodity and Derivatives Exchange) और MCX जैसे प्लेटफॉर्म्स विभिन्न कृषि कमोडिटीज के लिए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स प्रदान करते हैं, जिनमें चना (gram), जीरा (cumin), और सरसों (mustard) शामिल हैं। भारतीय सरकार भी यह सुनिश्चित करने के लिए एग्रो कमोडिटीज मार्केट को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि दाम सही हों और संचालन कुशल हो।

उदाहरण:
NCDEX चना फ्यूचर्स (NCDEX Chana Futures) कॉन्ट्रैक्ट भारत में ट्रेडर्स और किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। किसान इस कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग फसल कटाई के मौसम में चने की गिरती कीमतों के जोखिम के खिलाफ हेज करने के लिए करते हैं।

एग्रो कमोडिटीज डेरिवेटिव्स प्राइस वोलेटिलिटी (price volatility) को मैनेज करने, रिस्क (risk) से बचाने और कृषि बाजारों में स्पेकुलेट करने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे वैश्विक और भारतीय कृषि क्षेत्र बढ़ते हैं और नए चुनौतियों का सामना करते हैं, ये इंस्ट्रूमेंट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। अगले अध्याय में, हम तेल और ऊर्जा कमोडिटीज (Oil and Energy Commodities) की खोज करेंगे, जो वैश्विक बाजार में सबसे अधिक ट्रेड किए जाने वाले कमोडिटी सेक्टर्स में से एक है।

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